संसदीय कार्य मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक 29 मई को नई दिल्ली स्थित संसद भवन में आयोजित की गई। केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सरकारी कामकाज में राजभाषा हिंदी के प्रसार और उसके प्रभावी उपयोग की समीक्षा करना था। इस बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों, विषय विशेषज्ञों और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
बैठक में भाषाई नीतियों को सुदृढ़ करने के लिए जनप्रतिनिधियों और विशेषज्ञ सदस्यों का व्यापक समन्वय देखने को मिला। इसमें लोकसभा सदस्य मनोज कुमार तिवारी व अपराजिता सारंगी और राज्यसभा सदस्य संगीता यादव विशेष रूप से उपस्थित रहीं। इनके अलावा गैर-सरकारी सदस्यों के तौर पर एडवोकेट प्रवीरकुमार गुहराय, प्रोफेसर रामकिशोर शर्मा, प्रोफेसर कमलेश किशोर, डॉ. प्रकाश कुमार पटेल, अनुभव चक, डॉ. रामचंद्र रमेश आर्य, प्रवीण श्रीराम देशमुख और सुनील पांडेय ने भी चर्चा में हिस्सा लिया और अपने विचार साझा किए।
प्रशासनिक स्तर पर बैठक का संचालन और समन्वय वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में हुआ। संसदीय कार्य मंत्रालय के सचिव निकुंज बिहारी धल और अपर सचिव डॉ. सत्य प्रकाश सहित विभाग के अन्य नीति निर्धारकों ने इस चर्चा में भागीदारी की। वहीं, राजभाषा विभाग का प्रतिनिधित्व करने के लिए सहायक निदेशक भी इस आधिकारिक बैठक में विशेष रूप से मौजूद रहे।
सत्र की शुरुआत करते हुए मंत्रालय के सचिव निकुंज बिहारी धल ने सभी आगंतुकों का स्वागत किया। उन्होंने एक संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि मंत्रालय अपने दैनिक और आधिकारिक कार्यों में हिंदी के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इसके पश्चात, बैठक की अध्यक्षता कर रहे राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने समिति के सभी माननीय सदस्यों से राजभाषा के व्यावहारिक विस्तार को लेकर उनके बहुमूल्य सुझाव और रणनीतिक विचार आमंत्रित किए।
इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान पूर्व में लिए गए निर्णयों की प्रगति का भी मूल्यांकन किया गया। समिति ने 22 अगस्त 2025 को आयोजित हुई अपनी पिछली बैठक के कार्यवृत्त (मिनट्स) और उस पर मंत्रालय द्वारा की गई कार्रवाई की विस्तृत समीक्षा की। सदस्यों ने मंत्रालय के कामकाज में राजभाषा हिंदी के प्रगामी प्रयोग को और अधिक सुदृढ़ तथा परिणामोन्मुखी बनाने के उपायों पर गहन विमर्श किया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में संसदीय कार्य मंत्रालय के अपर सचिव डॉ. सत्य प्रकाश ने अध्यक्ष और उपस्थित सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने समिति को आश्वस्त किया कि बैठक के दौरान राजभाषा के विकास और प्रसार को लेकर जो भी रचनात्मक सुझाव दिए गए हैं, उन पर मंत्रालय द्वारा गंभीरता से अमल किया जाएगा और उचित कदम उठाए जाएंगे।