भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और स्टेट बैंक ऑफ वियतनाम (एसबीवी) ने 5 मई, 2026 को वित्तीय नवाचार तथा डिजिटल भुगतान प्रणालियों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस रणनीतिक पहल का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के मध्य सीमा-पार भुगतान संपर्कों को सुदृढ़ करना और क्यूआर कोड पर आधारित भुगतान नेटवर्क का विस्तार करना है। यह कदम वैश्विक फिनटेक हब के रूप में भारत की स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में अग्रसर है।
केंद्रीय बैंकों के बीच हुआ यह समझौता सूचनाओं के आदान-प्रदान, नियामकीय समन्वय और भुगतान प्रणालियों की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाकर डिजिटल लेन-देन के क्षेत्र में आपसी सहयोग को नया विस्तार देगा। इसके माध्यम से भारत और वियतनाम के बीच क्यूआर कोड-आधारित मर्चेंट भुगतानों के लिए सीमा-पार लेन-देन की सुविधा शुरू हो सकेगी। इस कदम से दोनों राष्ट्रों की डिजिटल भुगतान व्यवस्था अधिक आधुनिक, त्वरित और सुरक्षित बनेगी, जिससे भविष्य के संयुक्त नवाचार कार्यक्रमों और डिजिटल परियोजनाओं को लागू करना आसान होगा।
यह समझौता ज्ञापन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भुगतान प्रणालियों को अधिक पारदर्शी, सुगम और किफायती बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। नई व्यवस्था के तहत लेन-देन पर लगने वाले शुल्कों को पूरी तरह स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाएगा और भुगतान प्रक्रिया पहले के मुकाबले काफी तेज होगी। इस व्यवस्था के सुचारू रूप से लागू होने से दोनों देशों के व्यापारिक और पर्यटन क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खुलेंगे और पर्यटकों को डिजिटल भुगतान की बेहतर सुविधा मिलेगी।
सहयोग के व्यापक दायरे में डिजिटल भुगतान और वित्तीय सेवाओं से जुड़े नए बाजार रुझानों, उभरती तकनीकों, नियामकीय ढांचे तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। एमओयू की शर्तों के अनुसार, दोनों केंद्रीय बैंक डिजिटल भुगतान के विकास, इसकी निगरानी और नवाचार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां आपस में साझा करेंगे। इसके साथ ही, फास्ट पेमेंट सिस्टम, मैसेजिंग सिस्टम और कार्ड स्विचिंग नेटवर्क के क्षेत्रों में भी तकनीकी तालमेल को बढ़ाया जाएगा।
इस महत्वपूर्ण समझौते पर भारतीय रिजर्व बैंक और स्टेट बैंक ऑफ वियतनाम के डिप्टी गवर्नरों द्वारा हस्ताक्षर किए गए। केंद्रीय मंत्रिमंडल की औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद संपन्न हुआ यह समझौता भारत और वियतनाम की आर्थिक तथा डिजिटल भागीदारी को सुदृढ़ करने वाला एक दूरदर्शी कदम है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस संयुक्त प्रयास से सीमा-पार डिजिटल लेन-देन को नई रफ्तार मिलेगी और फिनटेक के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसरों का सृजन होगा।