केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को संयुक्त रूप से ‘मिशन सेनेहजोरी’ का उद्घाटन किया। इस दूरदर्शी योजना का मुख्य उद्देश्य असम के पारंपरिक मुगा रेशम उद्योग का आधुनिकीकरण करना और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के उच्च मूल्य वाले लक्जरी वस्त्र इकोसिस्टम के रूप में विकसित करना है, जिससे निर्यात को बढ़ावा मिल सके।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि यह मिशन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर पूर्वोत्तर’ के संकल्प को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने मुगा रेशम को भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि इस विशेष पहल के जरिए असम के इस सुनहरे धागे को एक अंतरराष्ट्रीय लक्जरी ब्रांड के रूप में पहचान दिलाई जाएगी।
इस व्यापक परियोजना को पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय, असम सरकार, वस्त्र मंत्रालय और केंद्रीय रेशम बोर्ड के आपसी सहयोग से धरातल पर उतारा जा रहा है। इसके अंतर्गत रेशम के पौधों की खेती, बीज उत्पादन, कताई (रीलिंग), बुनाई से लेकर उत्पाद की ब्रांडिंग, डिजिटल ट्रेसबिलिटी, निर्यात संवर्धन और सिल्क टूरिज्म जैसी पूरी मूल्य श्रृंखला (वैल्यू चेन) को सुदृढ़ किया जाएगा।
भौगोलिक संकेतक (जीआई) का दर्जा प्राप्त मुगा रेशम को विश्व का एकमात्र प्राकृतिक सुनहरा सिल्क माना जाता है। असम में करीब 2.6 लाख परिवार इस पारंपरिक व्यवसाय से अपनी आजीविका चलाते हैं। वैश्विक स्तर पर अत्यधिक मांग होने के बाद भी स्थानीय हितधारकों को इसका उचित आर्थिक लाभ नहीं मिल पा रहा था, और यह नया मिशन इसी अंतर को पाटने के लिए तैयार किया गया है।
शुरुआती चरण में यह अभियान असम के आठ प्रमुख मुगा उत्पादक क्षेत्रों—जोरहाट, शिवसागर, लखीमपुर, धेमाजी, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, माजुली और सुआलकुची में क्लस्टर मॉडल के तहत संचालित होगा। इसके तहत किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का गठन किया जाएगा, साझा सुविधा केंद्र स्थापित होंगे और जीआई सर्टिफिकेशन के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच आसान बनाई जाएगी।
केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि अगले तीन वर्षों में इस पूरी योजना पर लगभग 396 करोड़ से 411 करोड़ रुपए के निवेश का अनुमान है। इस भारी निवेश का लक्ष्य मुगा उत्पादकों के लाभांश को बढ़ाना और असम को सिल्क-आधारित सांस्कृतिक व अनुभवात्मक पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है। वर्तमान में इन उत्पादकों की सालाना आय मात्र 18,000 से 21,000 रुपए के बीच है, जिसे सुधार कर उत्पाद का पूरा प्रीमियम सीधे बुनकरों और पालकों तक पहुंचाने की योजना है।
साल 2028 तक के लिए निर्धारित लक्ष्यों के तहत पांच आधुनिक मुगा रीलिंग इकाइयां और एक स्पन मिल स्थापित की जाएगी। इसके अलावा, 30 एफपीओ और 1,180 से अधिक किसान हित समूहों का गठन होगा, तथा 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र में मेजबान पौधों का पुनर्विकास किया जाएगा। रणनीति के तहत 80 प्रतिशत से अधिक मुगा सिल्क का जीआई प्रमाणीकरण सुनिश्चित करने के साथ ही 8,000 से अधिक परिवारों के लिए डिजिटल ट्रेसबिलिटी सिस्टम बनाया जाएगा, ताकि सालाना निर्यात को 2,000 किलोग्राम से पार ले जाया जा सके।
उद्योग को पर्यटन से जोड़ते हुए ‘मुगा सिल्क ट्रेल’, सिल्क टूरिज्म पार्क और वार्षिक मुगा उत्सवों का आयोजन भी इस कार्ययोजना का हिस्सा है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे राज्य के रेशम क्षेत्र के लिए एक युगांतरकारी कदम बताया और कहा कि इससे सांस्कृतिक संरक्षण के साथ-साथ किसानों, कारीगरों और नए उद्यमियों के लिए समृद्धि के नए द्वार खुलेंगे।