मध्य प्रदेश कैबिनेट का बड़ा फैसला: स्वास्थ्य और जन-कल्याण के लिए ₹21,485 करोड़ मंजूर, रजिस्ट्री फीस और स्टॉम्प ड्यूटी पूरी तरह माफ

मध्य प्रदेश कैबिनेट का बड़ा फैसला: स्वास्थ्य और जन-कल्याण के लिए ₹21,485 करोड़ मंजूर, रजिस्ट्री फीस और स्टॉम्प ड्यूटी पूरी तरह माफ

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में राज्य के चौमुखी विकास और जन-कल्याण को ध्यान में रखते हुए 21 हजार 485 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधानों को हरी झंडी दी गई। इस बैठक में शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कई ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णय लिए गए। आम जनता को सीधे तौर पर बड़ी राहत प्रदान करते हुए कैबिनेट ने ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ के तहत स्टॉम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क को शत-प्रतिशत माफ करने का ऐलान किया है, जिसका 3800 करोड़ रुपये का पूरा वित्तीय बोझ राज्य सरकार स्वयं उठाएगी। इसके अलावा, चिकित्सा व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के लिए 17 हजार 59 करोड़ रुपये की बड़ी धनराशि स्वीकृत की गई है।

मंत्रि-परिषद के निर्णयों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग को मिली इस भारी-भरकम राशि से प्रदेश में नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की जाएगी, साथ ही एमबीबीएस (MBBS) और पोस्ट ग्रेजुएट (PG) पाठ्यक्रमों की सीटों में भी बढ़ोतरी की जाएगी। चिकित्सा महाविद्यालयों से संबद्ध अस्पतालों के सुचारू संचालन के लिए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की अवधि हेतु 14,363.95 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इसके अंतर्गत वर्तमान में 12 जिला मुख्यालयों पर अस्पतालों का संचालन किया जा रहा है। साथ ही, पीजी सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए 657 करोड़ रुपये और उज्जैन, सिवनी, छतरपुर, दमोह व बुदनी में नए चिकित्सा महाविद्यालयों के भवनों के निर्माण के लिए 1200 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। चिकित्सा संस्थानों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 838 करोड़ रुपये का प्रावधान अलग से किया गया है।

ग्रामीण विकास को नई गति देने और वित्तीय सुधारों को लागू करने के लिए कैबिनेट ने ‘मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम’ तथा ‘मध्य प्रदेश उपकर अधिनियम’ में आवश्यक संशोधनों से जुड़े अध्यादेशों के प्रारूपों को अपनी सहमति दे दी है। इसके तहत भारतीय संविधान के अनुच्छेद 213 के खंड (1) के अंतर्गत राज्यपाल महोदय के माध्यम से अध्यादेश प्रख्यापित करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उपकर अधिनियम में यह संशोधन राजस्व विभाग द्वारा संचालित स्वामित्व योजना के तहत संपत्तियों के व्यापक स्तर पर होने वाले पंजीकरण को सुव्यवस्थित करने तथा शासकीय राजस्व के हितों की रक्षा करने के उद्देश्य से किया गया है।

शिक्षा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भी सरकार ने कुछ अहम फैसले लिए हैं। सरकारी स्कूलों में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा पहली से आठवीं तक के छात्र-छात्राओं को मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा निविदा (टेंडर) प्रक्रिया के माध्यम से सिली-सिलाई स्कूल यूनिफॉर्म (गणवेश) उपलब्ध कराई जाएगी। नए सत्र की शुरुआत से पहले प्रत्येक विद्यार्थी को 2 जोड़ी गुणवत्तापूर्ण यूनिफॉर्म देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, इंदौर के पिपल्याहाना में निर्माणाधीन जिला न्यायालय भवन की संशोधित निर्माण लागत को मंजूरी दी गई है, जिसे 411 करोड़ 1 लाख रुपये से बढ़ाकर अब 626 करोड़ 61 लाख रुपये कर दिया गया है।

बैठक में कुछ पूर्व निर्णयों को कैबिनेट द्वारा कार्योत्तर स्वीकृति (अनुसमर्थन) भी दी गई। इसमें 30 अप्रैल 2026 को जबलपुर के बरगी बांध में हुई दुखद क्रूज दुर्घटना की न्यायिक जांच के लिए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की अध्यक्षता में गठित एकल सदस्यीय आयोग से जुड़े 10 मई 2026 के आदेश की संपुष्टि शामिल है। इसके साथ ही, मनोरंजन और सांस्कृतिक क्षेत्र के तहत दो हिंदी फीचर फिल्मों “तन्वी द ग्रेट” (निर्देशक: अनुपम खेर) और “शतक: संघ के 100 वर्ष” (निर्देशक: आशीष मल्ल) को मध्य प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर (SGST) से छूट देने के पूर्ववर्ती आदेशों का भी औपचारिक रूप से अनुसमर्थन किया गया।

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