नई दिल्ली में गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी विशेष सूक्ति श्रृंखला ‘सुभाषितम’ के तहत नागरिकों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया। प्रधानमंत्री ने देश के नाम अपने संदेश में अपील की है कि सभी लोग योग को अपनी रोज की आदतों में अनिवार्य रूप से शामिल करें। उन्होंने रेखांकित किया कि संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए योग एक अत्यंत प्रभावी माध्यम है।
प्रधानमंत्री ने अपने विचार साझा करते हुए लिखा कि जो लोग नियमित रूप से योग का अभ्यास करते हैं, उनका शरीर स्वस्थ और चित्त शांत रहता है। जीवन में संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने के लिए इसे अपनी प्रतिदिन की कार्यप्रणाली से जोड़ना बेहद जरूरी है।
सनातनी परंपरा के ज्ञान को आगे बढ़ाते हुए पीएम मोदी ने इस पोस्ट में महर्षि पतंजलि को समर्पित एक पौराणिक श्लोक को भी उद्धृत किया: “योगेन चित्तस्य पदेन वाचां मलं शरीरस्य च वैद्यकेन। योऽपाकरोत् तं प्रवरं मुनीनां पतञ्जलिं प्राञ्जलिरानतोऽस्मि॥” इस श्लोक का अर्थ समझाते हुए उन्होंने बताया कि वे मुनियों में श्रेष्ठ महर्षि पतंजलि के आगे शीश झुकाते हैं, जिन्होंने इंसानी मस्तिष्क की चंचलता को शांत करने के लिए योग, वाणी को शुद्ध व स्पष्ट बनाने के लिए व्याकरण और शरीर के विकारों को मिटाने के लिए आयुर्वेद जैसी महान विधाएं संसार को दीं।
विदित हो कि इससे पूर्व बुधवार को भी प्रधानमंत्री ने इसी श्रृंखला के तहत समाज में आपसी सद्भाव और एकजुटता का संदेश दिया था। उन्होंने कहा था कि नागरिकों के बीच का आपसी जुड़ाव ही किसी भी देश की असली ताकत होता है और जब सब मिलकर एक सूत्र में बंधते हैं, तो राष्ट्र कई गुना शक्तिशाली हो जाता है। उस संदेश में सामूहिक बल को दर्शाने के लिए लकड़ियों के उदाहरण वाले श्लोक का प्रयोग किया गया था।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में प्रधानमंत्री की इस ‘सुभाषितम’ पहल को लोगों में सकारात्मकता और राष्ट्र निर्माण की भावना भरने वाले प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। चूंकि आने वाले दिनों में योग दिवस का आयोजन होना है, ऐसे में प्रधानमंत्री का योग पर केंद्रित यह संदेश देशवासियों को शारीरिक और मानसिक रूप से सुदृढ़ बनने के लिए प्रेरित करने वाला है।