अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (स्थानीय समयानुसार) व्हाइट हाउस में बोलते हुए संकेत दिया है कि ईरान के साथ जारी कूटनीतिक बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और इस सप्ताहांत तक दोनों पक्षों के बीच एक नया समझौता हो सकता है। राष्ट्रपति के अनुसार, हालिया सैन्य तनातनी और कूटनीतिक प्रयासों के बाद तैयार किए जा रहे इस प्रस्तावित समझौते पर हस्ताक्षर होते ही रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को तत्काल प्रभाव से व्यापार के लिए खोल दिया जाएगा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने जानकारी दी कि अमेरिकी रक्षा बलों ने इस समुद्री क्षेत्र में पहले ही सुरक्षा इंतजाम पुख्ता कर दिए हैं, जिसके तहत अधिकांश संदिग्ध बारूदी सुरंगों (माइंस) को साफ किया जा चुका है। फारस की खाड़ी को वैश्विक समुद्री व्यापारिक मार्गों से जोड़ने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग है। यहाँ से अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) की बहुत बड़ी आपूर्ति होती है, जिसके कारण भारत सहित कई प्रमुख देशों की नजरें इस मार्ग की सुरक्षा पर टिकी रहती हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि इस पूरी वार्ता का प्राथमिक और सबसे बड़ा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु संपन्न राष्ट्र न बन सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समझौते की बुनियादी शर्त यही है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियारों का विकास, निर्माण या खरीद नहीं करेगा। ट्रंप के मुताबिक, भावी समझौते के प्रावधानों के तहत अमेरिका और ईरान मिलकर वहां के परमाणु केंद्रों पर बचे हुए संवेदनशील पदार्थों को सुरक्षित तरीके से हासिल करने और उन्हें पूरी तरह नष्ट करने की दिशा में भी काम कर सकते हैं।
सैन्य कार्रवाइयों का जिक्र करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी बी-2 बमवर्षक विमानों के हमलों से ईरान के परमाणु ढांचे को व्यापक क्षति पहुँची है। उन्होंने माना कि वर्तमान स्थिति में वहां बची हुई परमाणु सामग्रियों को खोजना और उन तक पहुँचना आसान कार्य नहीं है, फिर भी वे चाहते हैं कि आगामी कूटनीतिक समझौते के तहत इसे पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा जाए।
हालांकि दोनों देशों के बीच वर्तमान में काफी गंभीर तनाव बना हुआ है, लेकिन ट्रंप का मानना है कि हालिया सैन्य टकराव और जवाबी कार्रवाइयों के कारण शांति वार्ता की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसी बीच, उन्होंने एक अभूतपूर्व कूटनीतिक घटनाक्रम का खुलासा करते हुए बताया कि अमेरिका ने पहली बार ईरान समर्थित लेबनानी संगठन हिजबुल्लाह से सीधा संपर्क स्थापित किया है। उनके अनुसार, हिजबुल्लाह और इजरायल दोनों ही फिलहाल एक-दूसरे पर गोलाबारी रोकने के लिए सहमत हो गए हैं। राष्ट्रपति ने इस पूरे संकट को टालने में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की भूमिका की सराहना करते हुए उन्हें एक बेहतरीन सहयोगी बताया।