केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के तहत अप्रैल 2026 तक देश के करीब 36.8 लाख परिवारों को स्वच्छ और किफायती ऊर्जा का लाभ मिल चुका है। दिसंबर 2024 में जहां रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने वाले उपभोक्ताओं की संख्या महज 6.3 लाख थी, वहीं महज 16 महीनों के भीतर अप्रैल 2026 तक इसमें भारी इजाफा दर्ज किया गया और यह आंकड़ा 30 लाख के पार पहुंच गया।
इस युगांतरकारी योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 13 फरवरी, 2024 को की गई थी, जिसका मुख्य ध्येय घरेलू छतों पर सौर पैनल स्थापित कर आम नागरिकों को निशुल्क बिजली मुहैया कराना है। घरेलू स्तर पर दुनिया के सबसे बड़े रूफटॉप सोलर अभियान के रूप में पहचानी जाने वाली इस योजना का लक्ष्य मार्च 2027 तक एक करोड़ घरों को सौर ऊर्जा नेटवर्क से जोड़ना है। यह पहल भारतीय ऊर्जा क्षेत्र की पूरी तस्वीर को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
वित्तीय सहायता के मोर्चे पर, यह योजना उपभोक्ताओं को अपने घरों में सौर प्रणाली स्थापित करने के लिए आकर्षक सब्सिडी प्रदान करती है, जिसके माध्यम से हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली सुनिश्चित की जाती है। इस कदम से न केवल निर्धन और मध्यम वर्गीय परिवारों के मासिक बिजली बिलों में भारी कटौती हुई है, बल्कि उन्हें ग्रिड को अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई करने का एक नया जरिया भी मिला है। एक लोक-कल्याणकारी नीति के रूप में, यह देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटाने की दिशा में कारगर साबित हो रही है।
यदि देश में बिजली के सार्वभौमिकरण के इतिहास को देखें, तो साल 2017 में ‘प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना’ यानी ‘सौभाग्य’ की शुरुआत की गई थी, ताकि देश के हर कोने में रोशनी पहुंचाई जा सके। इस व्यापक अभियान ने देश के उन सभी चिन्हित घरों तक बिजली का कनेक्शन पहुंचाया जो इससे वंचित थे। इस बुनियादी सुधार के कारण स्वास्थ्य सेवाओं और शैक्षणिक स्तर में व्यापक सुधार देखा गया, मिट्टी के तेल (केरोसिन) पर निर्भरता समाप्त हुई और विशेषकर महिलाओं के जीवन स्तर व सुरक्षा में गुणात्मक बदलाव आया। मार्च 2019 तक इस योजना के माध्यम से शत-प्रतिशत लक्षित घरों का विद्युतीकरण पूरा कर लिया गया था।
ग्रामीण इलाकों में बिजली के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से साल 2014 में ‘दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना’ को अमलीजामा पहनाया गया था। इस योजना का फोकस न केवल घरों बल्कि सार्वजनिक सड़कों और सामुदायिक केंद्रों तक बिजली का विस्तार करना था, ताकि कृषि कार्यों के लिए भी निरंतर और भरोसेमंद विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। व्यापक प्रयासों की बदौलत वर्ष 2025 तक देश के 100 प्रतिशत गांवों को बिजली ग्रिड से पूरी तरह जोड़ दिया गया।
इन निरंतर नीतिगत सुधारों और बुनियादी पहलों का सीधा असर देश में बिजली की उपलब्धता पर दिखाई दे रहा है। आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में जहां वित्त वर्ष 2014 के दौरान प्रतिदिन औसतन 12.5 घंटे ही बिजली मिलती थी, वहीं वित्त वर्ष 2025 में यह उपलब्धता बढ़कर 22.6 घंटे प्रतिदिन हो गई। इसी प्रकार, शहरी इलाकों में भी बिजली आपूर्ति की अवधि वित्त वर्ष 2014 के 22.1 घंटों से सुधरकर वित्त वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 23.4 घंटे रोजाना तक पहुंच गई है।
सस्ती और निर्बाध बिजली की इस उपलब्धता ने देश के सामाजिक और आर्थिक विकास को एक नई गति दी है। बिजली से चलने वाले पंपों और आधुनिक सिंचाई प्रणालियों के कारण कृषि क्षेत्र की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही, इस मजबूत बुनियादी ढांचे ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में औद्योगिक उत्पादन क्षमताओं को बढ़ाने और व्यापारिक विकास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।