सोमवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अफगानिस्तान के घटनाक्रम पर हुई चर्चा के दौरान भारत ने पाकिस्तान की सैन्य हरकतों पर कड़ा ऐतराज जताया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने अफगानिस्तान में इस्लामाबाद द्वारा अंजाम दी जा रही ‘अविवेकपूर्ण’ हिंसा की भर्त्सना करते हुए वहां के नागरिकों और संयुक्त राष्ट्र के रुख का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल द्वारा ‘अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन’ (UNAMA) की मंशा और यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की रिपोर्ट की निष्पक्षता पर उठाए गए सवालों को पूरी तरह खारिज कर दिया।
भारतीय राजनयिक ने वैश्विक मंच से संदेश देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों के प्रति निष्ठा रखना अनिवार्य है; कोई भी देश अपनी सुविधानुसार इसे अपनाने या ठुकराने की नीति नहीं चल सकता। उन्होंने इस बात पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया कि रमजान के मुकद्दस महीने में भी पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के भीतर हवाई हमले किए, जो अंतरराष्ट्रीय संधियों और इस्लामी एकजुटता के सिद्धांतों के मामले में उसके दोहरे चरित्र को उजागर करता है।
सुरक्षा परिषद के समक्ष भारत ने संयुक्त राष्ट्र प्रमुख की उस चिंता का समर्थन किया, जिसमें सीमा पार से होने वाली गोलीबारी, हवाई हमलों और लक्षित हत्याओं के कारण आम नागरिकों के मारे जाने पर दुख व्यक्त किया गया था। पी. हरीश ने स्पष्ट किया कि भारत अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन और नागरिक सुरक्षा को प्राथमिकता देने से जुड़े महासचिव के आह्वान का पूर्ण रूप से समर्थन करता है।
इसके साथ ही, भारत ने यूएनएएमए की उस मांग को भी सही ठहराया जिसमें दोषी तत्वों की जवाबदेही तय करने, भविष्य में ऐसी हिंसक घटनाओं पर रोक लगाने और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए उच्च स्तरीय जांच की वकालत की गई थी। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि 26 जनवरी से 31 मार्च की अवधि में 372 अफगान नागरिक असमय मौत के मुंह में चले गए और 392 अन्य घायल हुए। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से अधिकांश मौतें हवाई हमलों और सीमा पार से हुई गोलीबारी की वजह से हुईं।
रिपोर्ट में इस बात का विशेष तौर पर विवरण दिया गया है कि 16 मार्च को काबुल स्थित ‘ओमिड ड्रग रिहैबिलिटेशन हॉस्पिटल’ को हवाई हमले का निशाना बनाया गया था। इस हमले में करीब 269 लोगों की जान गई थी और 122 लोग जख्मी हुए थे, जिनमें एक बड़ी संख्या इलाज करा रहे मरीजों की थी।
इस बीच, पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने बचाव करते हुए आरोप लगाया कि संयुक्त राष्ट्र की यह रिपोर्ट अफगानिस्तान के आंतरिक संकट की जिम्मेदारी बाहरी तत्वों पर डालने का प्रयास कर रही है। उन्होंने यूएनएएमए की कार्यप्रणाली, उसकी रिपोर्टों की सत्यता और तालिबान के साथ उसके संपर्कों पर आपत्ति जताई। पाकिस्तानी राजनयिक ने इन हिंसक हमलों को आतंकवाद के खिलाफ अपनी सुरक्षात्मक कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत किया।
पाकिस्तान के इस तर्क पर कड़ा प्रहार करते हुए भारतीय प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि आम लोगों के नरसंहार को केवल ‘सैन्य ऑपरेशन’ का नाम दे देने से कोई भी दोषी कानून की नजरों में बेदाग साबित नहीं हो सकता। उन्होंने दो टूक कहा कि निर्दोष नागरिकों की जान लेना, उन्हें अपंग बनाना और मासूमों को अनाथ करना किसी भी दृष्टिकोण से आतंकवाद विरोधी अभियान का हिस्सा नहीं हो सकता। उन्होंने अफगानिस्तान में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बहाल करने के संकल्प के साथ काम कर रहे यूएनएएमए के प्रति भारत के निरंतर और पूर्ण सहयोग की प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया।