मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग ने शुरू की नई टोल-फ्री हेल्पलाइन, अब फोन पर ही दर्ज होंगी शिकायतें

मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग ने शुरू की नई टोल-फ्री हेल्पलाइन, अब फोन पर ही दर्ज होंगी शिकायतें

मध्यप्रदेश में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, सुरक्षा और उनके सम्मान को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राज्य महिला आयोग ने एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने प्रदेश की महिलाओं के लिए एक विशेष टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-233-6112 का संचालन शुरू किया है। इस नई व्यवस्था के अंतर्गत राज्य की पीड़ित महिलाएं बिना किसी परेशानी के सीधे आयोग से संपर्क साध सकती हैं और अपनी शिकायतें, परेशानियां या सुझाव साझा कर सकती हैं।

इस नई सेवा का औपचारिक उद्घाटन राजधानी भोपाल में स्थित राज्य महिला आयोग के कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान किया गया। इस दौरान आयोग की अध्यक्ष श्रीमती रेखा यादव, आयोग की सदस्य श्रीमती साधना स्थापक और सचिव श्री सुरेश तोमर ने संयुक्त रूप से इस हेल्पलाइन सेवा को जारी किया। इस खास मौके पर आयोग के कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।

लोकार्पण के अवसर पर अध्यक्ष श्रीमती रेखा यादव ने जोर देकर कहा कि महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ केवल नीतियां बनाना नहीं है, बल्कि पीड़ितों तक न्याय और मदद की पहुंच को आसान बनाना भी है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह टोल-फ्री नंबर महिलाओं और आयोग के बीच की दूरी को खत्म करेगा, जिससे पीड़ितों की समस्याओं पर तुरंत संज्ञान लेकर कड़ी कार्रवाई की जा सकेगी। यह सेवा विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए जीवनदायिनी साबित होगी जो दूरी या किसी अन्य मजबूरी के कारण व्यक्तिगत रूप से आयोग के दफ्तर नहीं पहुंच पाती हैं। उन्होंने राज्य की महिलाओं से आह्वान किया कि वे बिना किसी डर या झिझक के इस नंबर पर अपनी शिकायतें दर्ज कराएं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आयोग की सदस्य श्रीमती साधना स्थापक ने कहा कि संस्था का मुख्य ध्येय महिलाओं को भयमुक्त, आदरयुक्त और न्यायपूर्ण माहौल देना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस हेल्पलाइन पर आने वाले हर मामले को पूरी संवेदनशीलता और तत्परता से सुना जाएगा ताकि पीड़ित महिलाओं को जल्द से जल्द न्याय मिल सके।

वहीं, आयोग के सचिव श्री सुरेश तोमर ने इस तकनीकी व्यवस्था की कार्यप्रणाली को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि यह हेल्पलाइन महज शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके जरिए महिलाओं को कानूनी व व्यावहारिक परामर्श दिया जाएगा और मामलों की निगरानी (फॉलोअप) भी की जाएगी। इस कदम से आयोग की पूरी कार्यप्रणाली और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह तथा जन-सुलभ बनेगी।

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