लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे भारतीय सेना के नए प्रमुख, जून के अंत में संभालेंगे कार्यभार

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे भारतीय सेना के नए प्रमुख, जून के अंत में संभालेंगे कार्यभार

केंद्र सरकार ने भारतीय सेना के नए प्रमुख के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ की नियुक्ति की घोषणा की है। वर्तमान में सेना के उप-प्रमुख (वाइस चीफ) के पद पर कार्यरत लेफ्टिनेंट जनरल सेठ इस महीने के अंत में सेवानिवृत्त हो रहे जनरल उपेंद्र द्विवेदी का स्थान लेंगे। बख्तरबंद कोर (आर्म्ड कॉर्प्स) से ताल्लुक रखने वाले लेफ्टिनेंट जनरल सेठ का यह चयन इस मायने में ऐतिहासिक है कि साल 1997 में जनरल शंकर रॉय चौधरी के बाद वे इस युद्धक शाखा से थल सेनाध्यक्ष बनने वाले पहले अधिकारी होंगे। लगभग 40 वर्षों के अपने सेवाकाल में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कमांड और स्टाफ पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं, जिससे उन्हें रणनीतिक और संगठनात्मक स्तर का व्यापक अनुभव प्राप्त है।

नवनियुक्त सेना प्रमुख का कार्यकाल अगस्त 2028 तक रहने की संभावना है। उनकी यह जिम्मेदारी ऐसे संवेदनशील समय में शुरू हो रही है जब भारतीय सेना आधुनिकीकरण के दौर से गुजर रही है। इस समय चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर सैन्य तैयारियों को मजबूत करने के साथ-साथ ‘इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड’ के ढांचे को लागू करना सेना की प्राथमिकताओं में शामिल है। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के पूर्व छात्र रहे लेफ्टिनेंट जनरल सेठ दिसंबर 1986 में सेना के बख्तरबंद कोर में कमीशन हुए थे। अपने लंबे और उत्कृष्ट करियर के दौरान उन्होंने भारतीय सेना की युद्धक क्षमताओं को बढ़ाने तथा दूरगामी सुधारों को लागू करने में बेहद अहम योगदान दिया है।

सैन्य अभियानों के मोर्चे पर उनका अनुभव काफी व्यापक रहा है। उन्होंने विभिन्न भौगोलिक और ऑपरेशनल क्षेत्रों में सेना की इकाइयों का नेतृत्व किया है। उनके अनुभवों में रेगिस्तानी क्षेत्रों में बख्तरबंद रेजिमेंट की कमान संभालना, पश्चिमी मोर्चे पर आर्म्ड ब्रिगेड का नेतृत्व करना और जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील इलाके में आतंकवाद रोधी बल का संचालन करना शामिल है। लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर पदोन्नत होने के बाद उन्होंने सेना के प्रमुख स्ट्राइक फॉर्मेशन में गिने जाने वाले ‘सुदर्शन चक्र कॉर्प्स’ का कुशलतापूर्वक नेतृत्व किया।

इसके बाद उन्होंने दिल्ली एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) की जिम्मेदारी संभाली। इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने देश की राजधानी में महत्वपूर्ण सैन्य गतिविधियों, औपचारिक कर्तव्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के बड़े आयोजनों के समन्वय का काम देखा। थल सेना कमांडर के पद पर प्रोन्नत होने के बाद लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने दक्षिण-पश्चिमी और दक्षिणी कमान दोनों का नेतृत्व किया। वे भारतीय सेना के उन गिने-चुने शीर्ष अधिकारियों में शामिल हैं जिन्हें दो ऑपरेशनल सैन्य कमानों की कमान संभालने का अवसर मिला है। ढाई साल से अधिक के इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने देश के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य थिएटरों की रणनीतिक कमान संभाली।

फील्ड में कमान संभालने के अतिरिक्त उन्होंने सेना मुख्यालय में कई महत्वपूर्ण नीतिगत और रणनीतिक पदों पर भी कार्य किया, जिसने सेना की परिचालन योजना और क्षमता विकास को नई दिशा दी। उन्होंने सेना मुख्यालय के रणनीतिक योजना और क्षमता विकास विंग में अपनी सेवाएं देते हुए सेना के आधुनिकीकरण के रोडमैप, नई क्षमताओं को जोड़ने और दीर्घकालिक पुनर्गठन की योजनाओं को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। उनका यह कार्य भविष्य की युद्ध तकनीकों के साथ मौजूदा सैन्य आवश्यकताओं के सामंजस्य को स्थापित करने में बेहद मददगार साबित हुआ है।

एक कुशल सैन्य रणनीतिकार के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने सैन्य शिक्षा के क्षेत्र में भी हमेशा उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उन्होंने ‘हायर कमांड कोर्स’ और ‘नेशनल डिफेंस कॉलेज’ से उच्च शिक्षा प्राप्त की है। इसके अलावा उन्होंने फ्रांस की राजधानी पेरिस से प्रतिष्ठित ‘कमांड एंड स्टाफ कोर्स’ भी पूरा किया है, जो वैश्विक सैन्य मामलों पर उनकी गहरी पकड़ को दर्शाता है। भारतीय सेना जब सुरक्षा की नई चुनौतियों और आंतरिक बदलावों के दौर से गुजर रही है, तब लेफ्टिनेंट जनरल सेठ देश की रक्षा व्यवस्था को आगे ले जाने के लिए तैयार हैं। राष्ट्र के प्रति उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें ‘परम विशिष्ट सेवा मेडल’ (पीवीएसएम) और कई अन्य प्रतिष्ठित सैन्य सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

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