केंद्र सरकार ने देश के परिवहन क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए ईंधन के तौर पर 100 प्रतिशत शुद्ध इथेनॉल के इस्तेमाल को अपनी हरी झंडी दे दी है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार, 13 जून को नागपुर में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में इस महत्वपूर्ण निर्णय की घोषणा की। इस नीतिगत फैसले का मुख्य उद्देश्य विदेशी कच्चे तेल (फॉसिल फ्यूल) के आयात पर भारत की निर्भरता को घटाना और वाहनों से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण पर लगाम लगाना है।
केंद्रीय मंत्री गडकरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक निर्णय से जुड़े दिशा-निर्देशों और विनियमों (रेगुलेशंस) को अंतिम रूप दे दिया गया है और उन्होंने संबंधित आधिकारिक दस्तावेज पर अपने हस्ताक्षर भी कर दिए हैं। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से आने वाले समय में देश के ऊर्जा क्षेत्र में बड़े और सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।
देश का ऑटोमोबाइल उद्योग भी सरकार के इस फैसले के साथ कदम मिलाने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रहा है। नितिन गडकरी के अनुसार, वाहन निर्माता कंपनियों ने इस नए बदलाव को सहर्ष स्वीकार किया है और वे शत-प्रतिशत इथेनॉल से संचालित होने वाली गाड़ियां पेश करने की तैयारियों में जुट गई हैं।
केंद्रीय मंत्री ने समय-सीमा का उल्लेख करते हुए बताया कि टोयोटा, सुजुकी, एमजी (MG) और हुंडई जैसी दिग्गज वाहन निर्माता कंपनियां अगले छह हफ्तों के भीतर अपने ऐसे नए मॉडल्स भारतीय बाजार में उतारने जा रही हैं, जो पूरी तरह से इथेनॉल ईंधन पर चलेंगे। बाजार में इन गाड़ियों के आने से उपभोक्ताओं को एक नया और आधुनिक विकल्प मिलेगा।
आर्थिक मोर्चे पर इस फैसले के फायदों को रेखांकित करते हुए गडकरी ने कहा कि पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल एक बेहद किफायती और टिकाऊ विकल्प साबित होगा। वर्तमान में भारत को अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विदेशों से भारी मात्रा में क्रूड ऑयल का आयात करना पड़ता है, जिससे देश के राजस्व पर अत्यधिक वित्तीय भार पड़ता है।
शुद्ध इथेनॉल के ईंधन के रूप में उपलब्ध होने से आम नागरिकों को न केवल महंगे पेट्रोल की मार से बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि देश के भारी-भरकम ईंधन आयात बिल में भी उल्लेखनीय कटौती दर्ज की जा सकेगी। यह कदम देश की आर्थिक स्थिति को मजबूती देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक होगा।