भारत के अटल नवाचार मिशन (नीति आयोग) और ला फोंडेशन दसॉल्ट सिस्टम्स ने मिलकर रविवार को फ्रांस में ‘भारत-फ्रांस एटीएल ब्रिज’ का शुभारंभ किया। इस रणनीतिक पहल का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के युवा अन्वेषकों (नवप्रवर्तकों) के बीच आपसी सहयोग को मजबूत करना है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के उस साझा दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसके तहत दोनों देशों के बीच नवाचार आधारित द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने का संकल्प लिया गया है।
इस दूरदर्शी परियोजना की नींव भारत के सफल ‘अटल टिंकरिंग लैब’ (एटीएल) मॉडल पर आधारित है। इसी तर्ज पर अब फ्रांस में भी अपनी तरह की पहली स्कूली नवाचार प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है। इस नए ढांचे के माध्यम से दोनों देशों के स्कूली छात्रों को एक साथ मिलकर काम करने का अवसर मिलेगा। यह मंच दोनों देशों के इनोवेशन इकोसिस्टम को आपस में जोड़ते हुए द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने में मददगार साबित होगा।
इस महत्वपूर्ण साझेदारी को आधिकारिक रूप देने के लिए रविवार को फ्रांस में एक आशय-पत्र (एलओआई) पर हस्ताक्षर किए गए। कार्यक्रम के दौरान नीति आयोग के अटल नवाचार मिशन के निदेशक दीपक बागला और ला फोंडेशन दसॉल्ट सिस्टम्स की प्रबंध निदेशक मैरी-पियरे ओलास ने इस सहमति पत्र का आदान-प्रदान किया। यह समझौता दोनों देशों के बीच तकनीकी और शैक्षणिक सहयोग की एक नई रूपरेखा तैयार करता है।
यह ‘एटीएल ब्रिज’ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उद्यमिता और नवाचार कार्यक्रमों को गति देने के लिए एक मुख्य केंद्र के रूप में कार्य करेगा। इसके तहत ज्ञान साझा करने, कौशल विकास और संयुक्त अनुसंधान गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस व्यवस्था से युवाओं को व्यावहारिक और वास्तविक जीवन की चुनौतियों का मिलकर समाधान खोजने का मौका मिलेगा, जिससे शुरुआती स्तर पर ही उनके भीतर छिपी प्रतिभा को निखारा जा सके।
इस कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षकों, विद्यार्थियों और उद्योग जगत से जुड़े लोगों के बीच एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इसका अंतिम लक्ष्य दोनों देशों में नवाचार की संस्कृति को समृद्ध करना और एक ऐसी दीर्घकालिक साझेदारी का निर्माण करना है जो दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद हो।
विशेष बात यह है कि इस ऐतिहासिक पहल की शुरुआत ‘भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026’ के दौरान की गई है। यह समयबद्ध कदम दर्शाता है कि दोनों देश भविष्य की चुनौतियों से निपटने और नई प्रतिभाओं को तराशने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। स्कूली स्तर पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग का यह अनूठा प्रयास आने वाले समय में दोनों देशों के शैक्षणिक और तकनीकी परिदृश्य को बदलने में अहम भूमिका निभाएगा।