आगामी 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में उत्तराखंड के ऋषिकेश में भारतीय सेना के जवानों के लिए एक विशेष योग सत्र आयोजित किया गया। गंगा नदी के पावन तट पर स्थित तपोवन आमखाला के नीम बीच पर आयोजित इस शिविर का संचालन आरोग्यधाम रिट्रीट (मां योग आश्रम) के योग गुरु और आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. अमृत राज ने किया। इस विशेष कार्यक्रम में रायवाला मिलिट्री स्टेशन (6 माउंटेन ब्रिगेड) के वरिष्ठ अधिकारियों, जवानों और एनसीसी कैडेट्स ने सक्रिय रूप से भाग लेकर योगासन का अभ्यास किया।
योग नगरी के रूप में विख्यात ऋषिकेश में आयोजित इस सत्र के दौरान उपस्थित सभी प्रतिभागियों को विभिन्न योगासनों, प्राणायाम और ध्यान की बारीकियों से अवगत कराया गया। कार्यक्रम के संचालक डॉ. अमृत राज ने सैन्य कर्मियों को शारीरिक और मानसिक मजबूती के लिए दैनिक जीवन में योग और आयुर्वेद को एकीकृत करने का परामर्श दिया। उन्होंने स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए आयुर्वेदिक जीवनशैली के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला और इससे जुड़े कई महत्वपूर्ण सूत्र साझा किए।
सत्र के दौरान योग के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए डॉ. अमृत राज ने कहा कि मानव जीवन का सबसे मूल प्रश्न यही है कि ‘मैं कौन हूं’। उन्होंने आगे समझाया कि इस प्रश्न का वास्तविक उत्तर स्वयं को एक दिव्य, शांत, प्रसन्न और आनंदित आत्मा के रूप में आत्मसात करने में ही निहित है। यह आयोजन वैश्विक स्तर पर होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व तैयारियों की एक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
इसी अभियान के अंतर्गत हरियाणा से भी योग तैयारियों से जुड़ी खबरें सामने आई हैं। हरियाणा विधानसभा परिसर में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के पूर्व निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत एक विशेष योग प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस सत्र में राज्य के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष हरविंदर कल्याण ने स्वयं उपस्थित रहकर योग अभ्यास में भाग लिया। वैश्विक तैयारियों के हिस्से के रूप में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन, राष्ट्रगान और हरियाणा के राज्य गीत के साथ किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ऐतिहासिक घटनाक्रमों का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के पटल पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था, तब संपूर्ण विश्व ने भारत की इस अनूठी पहल का पुरजोर स्वागत किया था। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि उस समय दुनिया के 170 देशों ने इस प्रस्ताव को अपना समर्थन देकर इसे सर्वसम्मति से पारित कराया था।
अपने संबोधन के समापन पर मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि योग को वैश्विक पटल पर मिला यह व्यापक समर्थन महज एक औपचारिक प्रस्ताव की स्वीकृति नहीं थी। बल्कि यह वास्तव में संपूर्ण विश्व बिरादरी द्वारा भारत की समृद्ध सांस्कृतिक चेतना, क्षमता और उसकी ऐतिहासिक विरासत को दिया गया एक सर्वोच्च सम्मान था।