भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन रक्षा उत्पादन विभाग के उप महानिदेशक (स्वदेशीकरण) श्री सुशील कुमार सतपुते ने भोपाल में आयोजित एक कार्यशाला के दौरान कहा कि उद्योग, एमएसएमई, स्टार्टअप, अनुसंधान और शैक्षणिक संस्थानों के एक साझा मंच पर आने से ही देश रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सकेगा। आगामी 20-21 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में होने वाले राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन “आत्मनिर्भरता इन डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग : प्रमोटिंग स्टेट-लेवल इकोसिस्टम्स” की तैयारियों के सिलसिले में मध्य प्रदेश शासन द्वारा एमपीआईडीसी मुख्यालय में तीसरे चरण की इस राज्य स्तरीय फ्लैगशिप परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इस बैठक में रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण, नवाचार और उद्योग-अकादमिक तालमेल को मजबूत करने पर गहन चर्चा हुई।
इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में देश भर के 40 से अधिक प्रमुख उद्योगों, रक्षा प्रतिष्ठानों, अनुसंधान एवं शैक्षणिक संस्थानों और नीति विशेषज्ञों ने प्रत्यक्ष तथा वर्चुअल माध्यम से जुड़कर अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए। इस पूरी राष्ट्रीय मुहिम के तहत मध्य प्रदेश राज्य ‘इंडिजेनाइजेशन, एमएसएमई, स्टार्टअप एवं इनोवेशन इकोसिस्टम’ विषय पर सह-नेतृत्व (को-लीड) की अहम जिम्मेदारी निभा रहा है।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के प्रमुख सचिव श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य की उद्योग हितैषी नीतियां, उन्नत बुनियादी ढांचा, प्रचुर संसाधन और कुशल श्रम बल इसे देश का एक प्रमुख रक्षा विनिर्माण केंद्र बनाने की पूरी क्षमता रखते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कार्यशाला राज्य की भविष्य की रणनीति तय करने के साथ ही शासन, उद्योगों और अनुसंधान संस्थानों के बीच आपसी समन्वय को और बेहतर बनाएगी।
कार्यक्रम की शुरुआत में आगामी राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन की रूपरेखा, इसमें विभिन्न राज्यों की भूमिका और मध्य प्रदेश को मिली सह-नेतृत्व की जिम्मेदारी पर एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। इस मौके पर अधिकारियों ने बताया कि रक्षा उत्पादन विभाग ने इस राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए सात मुख्य रणनीतिक विषय तय किए हैं, जिन पर सभी राज्यों से रचनात्मक सुझाव मांगे जा रहे हैं।
इसी कड़ी में एमपीआईडीसी द्वारा ‘डिफेंस एवं एयरोस्पेस रणनीति वर्ष 2026-30’ का खाका पेश किया गया। इसमें छह रणनीतिक स्तंभों और 24 प्रमुख पहलों के जरिए प्रदेश में निवेश, नवाचार और विनिर्माण को बढ़ावा देने की योजना साझा की गई। इस प्रस्तुतीकरण में मध्य प्रदेश की औद्योगिक ताकत के रूप में जबलपुर की सैन्य वाहन निर्माण क्षमता, इटारसी के आयुध उत्पादन, ग्वालियर के बायो-केमिकल अनुसंधान और कटनी की धातुकर्म (मेटलर्जी) विशेषज्ञता का विशेष रूप से उल्लेख किया गया।
कार्यशाला के अंतिम सत्र में हितधारकों ने सातों रणनीतिक विषयों पर विस्तार से मंथन किया। इस दौरान बीईएमएल, आईआरईएल, आयुध निर्माणी इटारसी, सेंट्रल प्रूफ एस्टैब्लिशमेंट इटारसी, डीआरडीओ, विभिन्न आईआईटी (दिल्ली, इंदौर, कानपुर, भिलाई, मद्रास आदि), आईआईएससी बेंगलुरु और सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) सहित देश के कई नामचीन संस्थानों के प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अंत में एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक ने बताया कि इन प्राप्त सुझावों के आधार पर 30 जून 2026 तक एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रक्षा उत्पादन विभाग को भेजी जाएगी, जो राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में मध्य प्रदेश के प्रस्तावों का आधार बनेगी।