सोमवार को जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, भारत के लिए यूरिया, डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) और सल्फर लेकर आ रहे चार व्यावसायिक जहाजों ने हॉर्मुज जलसंधि (स्ट्रेट) को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। पिछले सप्ताह फारस की खाड़ी के इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को पार करने के बाद ये जहाज अब भारतीय तटों की ओर अग्रसर हैं।
वैश्विक व्यापार परिदृश्य में जारी मौजूदा बाधाओं के बीच, ये मालवाहक जहाज निर्धारित भारतीय बंदरगाहों—काकीनाडा, कृष्णपट्टनम, मुंद्रा और पारादीप की तरफ बढ़ रहे हैं। बंदरगाहों पर पहुंचते ही आयातित उर्वरकों को तुरंत उतारने की व्यवस्था की गई है, ताकि देश के मौजूदा खाद बफर को और मजबूत किया जा सके और कृषि क्षेत्र की आवश्यकताओं को समय पर पूरा किया जा सके। आंकड़ों के मुताबिक, 22 जून तक देश का कुल उर्वरक स्टॉक 196.08 लाख टन दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 168.67 लाख टन की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।
सरकारी विवरण के अनुसार, वर्तमान में मौजूद इस सुदृढ़ भंडार में 81.44 लाख टन यूरिया, 20.92 लाख टन डीएपी, 55.91 लाख टन एनपीके, 12.68 लाख टन एमओपी और 25.13 लाख टन एसएसपी शामिल है। मध्य पूर्व के संकट के पश्चात, 1 मार्च 2026 से 21 जून 2026 के दौरान कृषि गतिविधियों में तेजी आने के कारण उर्वरकों की कुल बिक्री बढ़कर 153.4 लाख टन पर पहुंच गई। यह आंकड़ा पिछले साल की इसी समयावधि में हुई 140.2 लाख टन की बिक्री से 13.2 लाख टन अधिक है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव और अनिश्चितताओं से भारतीय कृषकों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से सरकार ने घरेलू स्तर पर उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ रणनीतिक आयात पर विशेष ध्यान दिया है। इस संकट के बाद देश के भीतर खाद का उत्पादन बढ़कर 133.12 लाख टन हो गया, जबकि इसी दौरान विभिन्न भारतीय बंदरगाहों पर कुल 43.69 लाख टन उर्वरक का आयात किया गया।
भारत ने अपने हालिया वैश्विक टेंडर के माध्यम से 17.70 लाख टन यूरिया की खरीद का अनुबंध सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया है। इस नए समझौते के बाद, देश ने मौजूदा खरीफ सीजन की जरूरतों को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से कुल 90 लाख टन से अधिक यूरिया और पीएंडके (फॉस्फेटिक और पोटाश) उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है। आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया कि विदेशों में स्थित 28 भारतीय मिशनों के साथ सक्रिय कूटनीतिक समन्वय के कारण ही इस बड़े पैमाने पर खरीद और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय गलियारों के जरिए आयात मार्गों का विविधीकरण संभव हो सका।
आपूर्ति स्रोतों की बात करें तो देश में यूरिया का आयात ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्की और नीदरलैंड जैसे देशों से किया गया है। वहीं दूसरी ओर, लाल सागर मार्ग का उपयोग करते हुए रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब से डीएपी और एनपीके उर्वरकों की सुरक्षित आपूर्ति हासिल की गई है।