आरबीआई ने एफसीएनआर(बी) जमा और स्वैप सुविधा पर जारी की गाइडलाइन, एनआरआई लोन और ब्याज नियमों को किया स्पष्ट

आरबीआई ने एफसीएनआर(बी) जमा और स्वैप सुविधा पर जारी की गाइडलाइन, एनआरआई लोन और ब्याज नियमों को किया स्पष्ट

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) यानी एफसीएनआर(बी) जमा योजना और विशेष स्वैप सुविधा को लेकर उठ रहे विभिन्न सवालों पर 25 जून 2026 को एक विस्तृत प्रश्नोत्तर (एफएक्यू) जारी कर स्थिति स्पष्ट की है। केंद्रीय बैंक के इस स्पष्टीकरण के अनुसार, अब देश के वाणिज्यिक बैंक अनिवासी भारतीय (एनआरआई) ग्राहकों को उनकी एफसीएनआर(बी) जमा राशि के एवज में ऋण दे सकेंगे। इसके साथ ही वित्तीय संस्थानों को सुरक्षा के तौर पर इन जमा खातों पर ‘लियन’ (ग्रहणाधिकार) लगाने का अधिकार भी दे दिया गया है।

इस नियामक दिशा-निर्देश में रिजर्व बैंक ने साफ किया है कि विशेष विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा के अंतर्गत केंद्रीय बैंक केवल एफसीएनआर(बी) जमा की मूल रकम पर ही हेजिंग का खर्च उठाएगा। इस जमा राशि पर बनने वाले ब्याज को स्वैप सुविधा के दायरे से बाहर रखा गया है, जिससे बैंकों को इस स्कीम के तहत प्राप्त फंड की वास्तविक लागत का आकलन करने में आसानी होगी। गौरतलब है कि देश में विदेशी मुद्रा के प्रवाह को गति देने और बाहरी वित्तीय तंत्र को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 5 जून 2026 को आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने ईसीबी, विदेशी मुद्रा उधारी और एफसीएनआर(बी) के लिए इस विशेष स्वैप व्यवस्था समेत कई अन्य कदमों का एलान किया था।

नियामक के मुताबिक, इस प्रोत्साहन योजना के तहत जो बैंक 30 सितंबर 2026 तक तीन से पांच साल की अवधि वाली नई एफसीएनआर(बी) जमा राशियां हासिल करेंगे, उनके हेजिंग के पूरे वित्तीय बोझ का वहन खुद आरबीआई करेगा। नए स्पष्टीकरण के तहत भारतीय बैंक और विदेशों में कार्यरत उनकी शाखाएं खाताधारक एनआरआई को कर्ज देने के साथ-साथ विदेशी कर्जदाताओं के हक में स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट (एसबीएलसी) भी जारी करने के लिए अधिकृत होंगी।

आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि अनिवासी भारतीय खाताधारकों को विदेशों में भी कर्ज की सुविधा दी जा सकती है और बैंक सुरक्षा के रूप में जमा खाते को लियन के तहत रख सकते हैं। चूंकि स्वैप सुविधा का लाभ केवल मूलधन पर मिलेगा और ब्याज इसके दायरे में नहीं आएगा, इसलिए बैंकों को ब्याज भुगतान का प्रबंध अलग से करना होगा। हालांकि, यदि किसी एफसीएनआर(बी) जमा की शुरुआती अवधि तीन वर्ष या उससे अधिक थी, लेकिन स्वैप सुविधा का उपयोग करते समय उसकी बची हुई अवधि तीन साल से कम रह गई हो, तो भी बैंक इस विशेष सुविधा के योग्य माने जाएंगे।

केंद्रीय बैंक ने बैंकों को जमा की अवधि और उसकी रकम के आधार पर एफसीएनआर(बी) डिपॉजिट्स पर अलग-अलग ब्याज दरें तय करने की छूट प्रदान की है, बशर्ते वे रिजर्व बैंक के ब्याज दर संबंधी मूल नियमों के दायरे में हों। बैंकों के पास स्वैप सुविधा के बिना भी सामान्य एफसीएनआर(बी) योजनाएं संचालित करने का विकल्प रहेगा, लेकिन ऐसी जमाओं का बहीखाता अलग से मेंटेन करना होगा।

इसके अतिरिक्त, एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ईसीबी) के संदर्भ में यह स्पष्ट किया गया है कि कॉर्पोरेट कंपनियां तय नियमों के तहत किसी भी समयावधि के लिए विदेशी वाणिज्यिक कर्ज जुटा सकती हैं। परंतु, विशेष स्वैप सुविधा का फायदा केवल उन्हीं ईसीबी पर मिलेगा जिनकी न्यूनतम औसत मैच्योरिटी तीन साल की होगी। इस स्वैप की अवधि कर्ज अदायगी के समय के मुताबिक तय होगी, जिसकी अधिकतम सीमा पांच वर्ष निर्धारित की गई है। बैंकों के लिए एनआरआई डिपॉजिट जुटाना और फायदेमंद बनाने के लिए आरबीआई ने नई एफसीएनआर(बी) और एनआरई जमाओं को कैश रिजर्व रेशियो (सीआरआर) तथा स्टैट्यूटरी लिक्विडिटी रेशियो (एसएलआर) जैसी अनिवार्य आरक्षित सीमाओं से पूरी तरह मुक्त कर दिया है, जिससे बैंक ग्राहकों को अधिक आकर्षक ब्याज दरें दे सकेंगे।

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