मध्य प्रदेश के 13 जिलों में सिंचाई परियोजनाओं का काम पूरा, अगले छह महीनों में 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को मिलेगा पानी

मध्य प्रदेश के 13 जिलों में सिंचाई परियोजनाओं का काम पूरा, अगले छह महीनों में 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को मिलेगा पानी

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के अंतर्गत राज्य में सिंचाई व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण और विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। शासन द्वारा प्रदेश के 13 जिलों में पूर्ण हो चुकी विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं के लोकार्पण की प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। आगामी छह माह के भीतर इन परियोजनाओं को जनता को समर्पित कर दिया जाएगा, जिससे राज्य के लगभग 6 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में सिंचाई क्षमताओं का सीधा विस्तार होगा।

मंत्रालय में आयोजित जल संसाधन एवं नर्मदा घाटी विकास विभागों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने इन कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। इस बैठक में आधिकारिक तौर पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, बड़वानी, सीहोर, शाजापुर, देवास, झाबुआ, धार, खंडवा, खरगोन, अलीराजपुर, राजगढ़, जबलपुर, कटनी और मंडला जिलों की सिंचाई परियोजनाएं उद्घाटन के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इसके साथ ही आगामी सिंहस्थ महापर्व से संबंधित तीन प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा भी मुख्यमंत्री द्वारा की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट सहित मुख्यमंत्री कार्यालय, जल संसाधन और वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव एवं अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

अंतर-प्रांतीय नदी विकास के मोर्चे पर बैठक में बताया गया कि 8,400 करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित लागत वाली ‘केन-मंदाकिनी लिंक अंतर-राज्यीय सिंचाई परियोजना’ का विस्तृत प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत 20 किलोमीटर लंबी सुरंग (टनल) का निर्माण किया जाएगा। इसके पूर्ण होने से जहां एक ओर 93 हजार 310 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित होगी, वहीं दूसरी ओर 15.8 मेगावाट जल-विद्युत का उत्पादन भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।

सिंहस्थ के मद्देनजर उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में जारी कार्यों को लेकर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से विस्तृत फीडबैक लिया। बैठक में बताया गया कि सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना का लगभग 82 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, कान्ह डायवर्सन क्लोज्ड डक्ट परियोजना में 66 प्रतिशत तक प्रगति दर्ज की गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए क्षिप्रा नदी के तटों पर निर्मित किए जा रहे 29 किलोमीटर लंबे घाटों का निर्माण कार्य भी तीव्र गति से चल रहा है, जिसका 60 फीसदी काम संपन्न हो चुका है।

राज्य के समग्र सिंचित क्षेत्र का ब्यौरा देते हुए अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में निर्मित और निर्माणाधीन योजनाओं के पूरा होने पर मध्य प्रदेश का कुल सिंचित रकबा बढ़कर 95.45 लाख हेक्टेयर तक पहुंच जाएगा। यदि इसमें शासन स्तर से अन्य स्वीकृत प्राप्त परियोजनाओं को भी जोड़ दिया जाए, तो यह क्षमता 108 लाख हेक्टेयर के पार चली जाएगी। आंकड़ों के अनुसार, बीते ढाई वर्षों में राज्य के सिंचित क्षेत्र में करीब 10 लाख हेक्टेयर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण ‘केन-बेतवा अंतर-राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना’ के संबंध में जानकारी दी गई कि इससे क्षेत्र के 10 जिलों में वार्षिक स्तर पर 8.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी और साथ ही 130 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। इस परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन के विशेष पैकेज के अंतर्गत 90 प्रतिशत मुआवजा राशि का भुगतान अवार्ड पारित कर किया जा चुका है। इसके अलावा, बीना कॉम्प्लेक्स बहुउद्देश्यीय परियोजना के तहत चकरपुर और मड़िया बांधों का निर्माण कार्य संपन्न हो चुका है, जबकि संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना से 13 जिलों के 6.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई का लाभ मिलेगा।

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने वर्ष 2022 में क्षतिग्रस्त हुए कारम बांध के पुनर्निर्माण कार्यों की भी जानकारी ली, जिसका वर्ष 2024 से शुरू हुआ कार्य अब समाप्ति की ओर है। इसके साथ ही छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्प्लेक्स (चतुर्थ बांध परियोजना) तथा अन्य क्षेत्रीय सिंचाई परियोजनाओं की कार्य प्रगति की भी गहन समीक्षा की गई।

अंत में, मुख्यमंत्री ने नर्मदा नदी के जल को सोन नदी से जोड़ने वाली अत्यधिक महत्वपूर्ण ‘स्लीमनाबाद टनल’ के उद्घाटन के लिए आवश्यक प्रशासनिक तैयारियां समय से पूरी करने के सख्त निर्देश दिए। लगभग डेढ़ दशक से निर्माणाधीन 11.952 किलोमीटर लंबी और 10.140 मीटर व्यास वाली यह टनल अब लगभग बनकर तैयार है, जिसकी जल प्रवाह क्षमता 152 क्यूमेक है। बरगी व्यपवर्तन परियोजना के तहत निर्मित यह ट्रांस-वैली कैनाल प्रदेश की सबसे बड़ी (227 क्यूमेक डिस्चार्ज क्षमता) नहर प्रणाली है, जो जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, रीवा और पन्ना जिलों के लगभग 1,500 गांवों की ढाई लाख हेक्टेयर कृषि भूमि के लिए जीवनदायिनी साबित होगी।

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