न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड को तीसरे टेस्ट में 160 रन से हराया, 2-1 से ऐतिहासिक सीरीज जीतकर बेन स्टोक्स की विदाई का जश्न फीका किया

न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड को तीसरे टेस्ट में 160 रन से हराया, 2-1 से ऐतिहासिक सीरीज जीतकर बेन स्टोक्स की विदाई का जश्न फीका किया

न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम ने ट्रेंट ब्रिज में खेले गए रोमांचक मुकाबले के पांचवें दिन मेजबान इंग्लैंड को 160 रनों के बड़े अंतर से मात दे दी। इस शिकस्त के साथ ही इंग्लैंड के दिग्गज ऑलराउंडर बेन स्टोक्स की अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से जीत के साथ विदा होने की उम्मीदें टूट गईं। न्यूजीलैंड ने इस जीत की बदौलत तीन मैचों की टेस्ट श्रृंखला को 2-1 से अपने नाम कर लिया। जीत के लिए मिले 373 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड की पूरी टीम अपनी दूसरी पारी में महज 212 रनों पर ढेर हो गई।

मेहमान कीवी टीम के लिए यह खिताबी जीत बेहद ऐतिहासिक है, क्योंकि उन्होंने पूरे 27 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद इंग्लिश धरती पर कोई टेस्ट सीरीज जीती है। इससे पहले न्यूजीलैंड ने साल 1999 में यह उपलब्धि हासिल की थी। कुल मिलाकर इंग्लैंड में खेली गई 20 द्विपक्षीय टेस्ट सीरीज में न्यूजीलैंड की यह सिर्फ चौथी खिताबी जीत है। श्रृंखला की खास बात यह रही कि पहला मैच गंवाने के बाद न्यूजीलैंड ने शानदार वापसी की और लगातार दो मुकाबले जीतकर सीरीज पर कब्जा जमाया। कीवी टीम ने इंग्लैंड में दूसरी बार इस तरह की वापसी की है। दूसरी ओर, घरेलू परिस्थितियों में खेल रही इंग्लैंड की टीम को साल 2012 के बाद पहली बार अपने घर में तीन या उससे अधिक मैचों की टेस्ट सीरीज गंवानी पड़ी है।

इस मुकाबले का सबसे भावुक क्षण बेन स्टोक्स का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास रहा। 35 वर्षीय इस अनुभवी ऑलराउंडर ने मैच के चौथे दिन ही खेल को अलविदा कहने का ऐलान कर दिया था। लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लिश टीम के लिए स्टोक्स ने खुद बल्लेबाजी क्रम में ऊपर आकर पारी की शुरुआत की। उन्होंने महज 20 गेंदों में 30 रनों की तेज पारी खेलकर टीम को आक्रामक शुरुआत तो दी, लेकिन वे अपनी इस पारी को किसी बड़े स्कोर में तब्दील करने में नाकाम रहे।

मैच के पांचवें और अंतिम दिन के खेल में दो महत्वपूर्ण रनआउट ने पासा पलट दिया। इंग्लैंड ने सुबह 103 रनों पर 4 विकेट की स्थिति से आगे खेलना शुरू किया था, लेकिन खेल के पहले ही घंटे में मैच मेजबान टीम के नियंत्रण से बाहर हो गया। सबसे पहले गेंदबाज नाथन स्मिथ ने एमिलियो गे (10) को पवेलियन का रास्ता दिखाया। इसके तुरंत बाद हेनरी निकोल्स के एक सटीक डायरेक्ट हिट ने सेट बल्लेबाज जो रूट (18) को रनआउट कर इंग्लैंड को बहुत बड़ा झटका दिया।

इसके बाद कीवी टीम ने मैच पर अपना शिकंजा और कस लिया। स्पिनर मिचेल सैंटनर ने गस एटकिंसन को एलबीडब्ल्यू (LBW) आउट किया, जबकि जोश टंग दूसरे डायरेक्ट हिट का शिकार होकर रनआउट हुए। अंत में सैंटनर ने डटकर बल्लेबाजी कर रहे विकेटकीपर जेमी स्मिथ (60) को आउट करके इंग्लैंड की दूसरी पारी का 212 रन पर अंत कर दिया। शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों के विफल होने के बाद जेमी स्मिथ ने सर्वाधिक 60 रनों का योगदान दिया। उन्होंने गस एटकिंसन के साथ मिलकर आठवें विकेट के लिए 75 रनों की साझेदारी की और कुछ समय के लिए कीवी गेंदबाजों का प्रतिरोध किया, लेकिन दूसरे छोर से निरंतर विकेट गिरते रहने के कारण जेमी के आउट होते ही इंग्लैंड की बची-खुची उम्मीदें भी समाप्त हो गईं।

न्यूजीलैंड की इस ऐतिहासिक जीत की आधारशिला पहली पारी में ही रख दी गई थी, जब टीम ने 438 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। कप्तान टॉम लैथम (151) और सलामी बल्लेबाज डेवोन कॉनवे (157) ने पहले विकेट के लिए 317 रनों की विशाल मैराथन साझेदारी करके ब्रिटिश गेंदबाजों को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया था। इसके जवाब में इंग्लैंड अपनी पहली पारी में 354 रन ही बना सका, जिससे न्यूजीलैंड को 84 रनों की महत्वपूर्ण बढ़त हासिल हुई। अपनी दूसरी पारी में न्यूजीलैंड ने डेरिल मिचेल के नाबाद शतक (100*) और रचिन रवींद्र के शानदार 94 रनों के दम पर 288/9 के स्कोर पर पारी घोषित की और इंग्लैंड के सामने चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा।

यह खिताबी जीत न्यूजीलैंड के लिए इसलिए भी बड़ी है क्योंकि टीम पूरे मैच के दौरान खिलाड़ियों की चोटों से जूझती रही। तेज गेंदबाज मैट हेनरी पहले ही मुकाबले से बाहर थे, जिसके बाद मैच के दौरान ब्लेयर टिकनर भी चोटिल हो गए और उनकी जगह कन्कशन सब्स्टीट्यूट के रूप में जैक फाउल्क्स को मैदान पर उतरना पड़ा। हद तो तब हो गई जब आखिरी दिन विल ओ’रूर्के भी हैमस्ट्रिंग की समस्या के कारण मैदान छोड़ने पर मजबूर हो गए। इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कीवी टीम ने मानसिक दृढ़ता दिखाई। इस हार के साथ इंग्लैंड को 14 साल बाद अपने घरेलू मैदान पर ऐसी करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है। इंग्लैंड पिछले 9 टेस्ट मैचों में से 7 मुकाबले हार चुका है, जिसे कप्तान बेन स्टोक्स और कोच ब्रेंडन मैकुलम के ‘बैजबॉल’ युग का सबसे खराब दौर माना जा रहा है।

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