नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान नागालैंड के मंत्री टेमजेन इम्ना अलोंग ने केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की। इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य नागालैंड में लैवेंडर की खेती पर आधारित कृषि-उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एक ठोस रूपरेखा तैयार करना था। दोनों नेताओं ने अरोमा मिशन के अंतर्गत ‘पर्पल रिवोल्यूशन’ (बैंगनी क्रांति) की कामयाबी को नागालैंड के अन्य हिस्सों में विस्तारित करने और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से राज्य के विकास को नई रफ़्तार देने पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।
इस संवाद के दौरान पूर्वोत्तर में अरोमा मिशन के प्रभाव पर प्रकाश डाला गया। अधिकारियों ने बताया कि नागालैंड ने साल 2022 में इस मिशन के तहत ‘पर्पल रिवोल्यूशन’ को अंगीकार किया था, जिसकी शुरुआत ज़ुन्हेबोतो इलाके में एक स्टार्टअप समूह द्वारा लैवेंडर की खेती से की गई थी। अब इस सफल पहल को राज्य के बाकी जिलों में भी फैलाने की तैयारी है, ताकि स्थानीय किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी के लिए एक मजबूत कार्ययोजना पर काम किया जा सके।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विज्ञान के बदलते स्वरूप को रेखांकित करते हुए कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान अब सिर्फ लैब तक सीमित नहीं रह गया है। यह पूर्वोत्तर भारत में रोजगार के नए अवसर पैदा करने, उद्यमिता को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक बड़ा जरिया बन चुका है। उन्होंने भरोसा जताया कि अरोमा मिशन, लैवेंडर उत्पादन और सीएसआईआर की आधुनिक तकनीकें नागालैंड की छिपी हुई क्षमताओं को उजागर करने में मददगार साबित होंगी, जिससे किसानों और ग्रामीण समाज के जीवन स्तर में सीधा बदलाव आएगा।
बैठक में नागालैंड के शैक्षणिक और अनुसंधान ढांचे को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। राज्य के मंत्री ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की उन कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की, जो नागालैंड के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को वित्तीय मदद, मार्गदर्शन और बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए दी जा रही हैं। इस महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान नागालैंड सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सलाहकार कुझोलुज़ो (आज़ो) निएनु भी विशेष रूप से उपस्थित थे।
पूर्वोत्तर क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए टेमजेन इम्ना अलोंग ने केंद्र सरकार द्वारा मिल रहे निरंतर सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। वहीं, सलाहकार कुझोलुज़ो निएनु ने राज्य में साइंटिफिक रिसर्च का दायरा बढ़ाने, नए आविष्कारों को प्रोत्साहित करने और टेक्नोलॉजी आधारित आजीविका के नए मार्ग खोलने के संबंध में राज्य सरकार के दृष्टिकोण को सामने रखा।
इस बैठक का समापन दोनों पक्षों की इस प्रतिबद्धता के साथ हुआ कि केंद्र और राज्य मिलकर वैज्ञानिक शोधों को जमीन पर उतारेंगे। आने वाले समय में किसानों के अनुकूल तकनीकों, मजबूत अनुसंधान साझेदारियों और संस्थागत क्षमताओं को सुदृढ़ करके स्थानीय नागरिकों के लिए आजीविका के टिकाऊ और व्यावहारिक अवसर पैदा किए जाएंगे।