दुबई और अबू धाबी पहुंचे जम्मू-कश्मीर के प्रीमियम फल, घरेलू बाजार से दोगुने तक मिले दाम

दुबई और अबू धाबी पहुंचे जम्मू-कश्मीर के प्रीमियम फल, घरेलू बाजार से दोगुने तक मिले दाम

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तत्वावधान में काम कर रहे संगठन एपीईडीए (APEDA) ने शनिवार को एक डिजिटल कार्यक्रम के जरिए जम्मू-कश्मीर से अबू धाबी और दुबई के लिए प्रीमियम अरेको चेरी और सेंट्रोज प्लम की पहली खेप के निर्यात की शुरुआत की। मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, इस खेप में शोपियन और पुलवामा के बागवानों से ली गई एक मीट्रिक टन उच्च घनत्व वाली यूरोपीय मीठी चेरी और बेर शामिल हैं। यह कदम जम्मू-कश्मीर के उच्च मूल्य वाले बागवानी क्षेत्र की ताकत और दुनिया भर के बाजारों में भारतीय फलों की मजबूत होती मांग को प्रदर्शित करता है।

इस उपलब्धि को क्षेत्र के कृषि परिदृश्य के लिए बेहद अहम बताते हुए एपीईडीए के चेयरमैन अभिषेक देव ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में उच्च गुणवत्ता वाली बागवानी फसलों के उत्पादन और उनके निर्यात की अपार क्षमताएं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्था लगातार गुणवत्ता संवर्द्धन और वैश्विक बाजार तक पहुंच सुनिश्चित कर भारतीय किसानों की मदद कर रही है। यूएई को भेजे गए इन खास फलों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे स्थानीय स्तर पर नए अवसर पैदा होंगे और किसानों को उनकी उपज की बेहतर कीमत मिल सकेगी।

इस व्यापारिक पहल का सबसे सकारात्मक पहलू किसानों को मिलने वाला आर्थिक लाभ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ने के कारण उत्पादकों को मिलने वाले मुनाफे में भारी उछाल दर्ज किया गया है। स्थानीय बाजारों में मिलने वाली कीमतों की तुलना में इन बागवानों को चेरी के लिए 60 फीसदी और बेर के लिए 120 फीसदी तक ज्यादा मूल्य प्राप्त हुआ है। मूल्य संवर्द्धन का यह स्तर यह साबित करता है कि सीधे निर्यात से जुड़कर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।

इस पहली सफल खेप के बाद शोपियन और पुलवामा के साथ-साथ पूरी घाटी के फल उत्पादकों में निर्यात-केंद्रित कृषि पद्धतियों को अपनाने के प्रति उत्साह बढ़ने की संभावना है। एपीईडीए की ओर से निर्यात सुगमीकरण, गुणवत्ता नियंत्रण और विपणन के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयास इसी रणनीति का हिस्सा हैं। संयुक्त अरब अमीरात को किया गया यह ताजा निर्यात न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की व्यापारिक स्थिति को और पुख्ता करेगा, बल्कि देश के फल निर्यात को एक नई ऊंचाई पर ले जाने में भी मददगार साबित होगा।

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