मध्य प्रदेश को आगामी पांच वर्षों में दुग्ध उत्पादन में शीर्ष पर ले जाने का लक्ष्य, ग्वालियर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया विभिन्न विकास योजनाओं का शिलान्यास

मध्य प्रदेश को आगामी पांच वर्षों में दुग्ध उत्पादन में शीर्ष पर ले जाने का लक्ष्य, ग्वालियर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया विभिन्न विकास योजनाओं का शिलान्यास

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को ग्वालियर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित उन्नत कृषि संभागीय कार्यशाला में किसानों को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसानों की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए बहु-फसलीय प्रणाली और आधुनिक पशुपालन को अपनाना अनिवार्य है। उन्होंने घोषणा की कि वर्तमान में दुग्ध उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर मौजूद मध्य प्रदेश को अगले पांच सालों में शीर्ष पायदान पर लाया जाएगा। इस उद्देश्य के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास योजना के अंतर्गत ग्वालियर और सांची दुग्ध संघों को वित्तीय सहायता दी जा रही है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के कृषकों से सीधा संवाद कर उनके अनुभव जाने और कृषि व उद्यानिकी विभाग से जुड़े हितलाभों का वितरण किया।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत लगभग 13 करोड़ रुपये की लागत से ग्वालियर के खुरैरी और ग्राम जहांगीरपुर में बनने वाली अत्याधुनिक हाईटेक नर्सरी और फ्लोरीकल्चर गार्डन के प्रथम चरण का रिमोट के माध्यम से भूमिपूजन किया। इस कार्यक्रम में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री ऐदल सिंह कंषाना, उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया सहित संभाग के कई सांसद, विधायक और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

राज्य में सिंचाई संसाधनों के विस्तार पर चर्चा करते हुए डॉ. यादव ने बताया कि वर्ष 2023 के बाद से प्रदेश के सिंचित क्षेत्र में व्यापक वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2003 में जहाँ केवल साढ़े 7 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित था, वह अब बढ़कर करीब 50 लाख हेक्टेयर हो चुका है। सरकार का आगामी लक्ष्य इसे 100 लाख हेक्टेयर तक पहुँचाने का है। उन्होंने चंबल-पार्वती-कालीसिंध और केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही, उन्होंने किसानों को राहत देते हुए कहा कि अब कृषि ऋण चुकाने के लिए 31 मार्च की समयसीमा के स्थान पर पूरे एक वर्ष का समय उपलब्ध कराया गया है।

गौ-संरक्षण के विषय पर मुख्यमंत्री ने कहा कि महानगरीय क्षेत्रों में पुरानी खिड़क प्रणाली को समाप्त कर बड़े स्तर पर आधुनिक गौशालाएं स्थापित की जा रही हैं। ग्वालियर की लाल टिपारा गौशाला के तर्ज पर इंदौर, भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में बड़ी गौशालाएं बनाई जाएंगी और स्वदेशी नस्लों के सुधार पर काम होगा। कार्यशाला में प्रगतिशील किसानों जैसे प्राण सिंह माथुर (जिन्होंने अमरूद की ‘बिलौआ-22’ व ‘बिलौआ-रेड’ किस्में पेटेंट कराई हैं), बृजेन्द्र रावत और देवराज कुशवाह ने अपनी प्राकृतिक खेती के सफल अनुभवों को मुख्यमंत्री के साथ साझा किया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में ‘समन्वित कृषि प्रणाली इकाई’ और ‘बहु-स्तरीय कृषि पद्धति इकाई’ का लोकार्पण भी किया। विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला ने बताया कि ये इकाइयां किसानों के लिए व्यावहारिक और टिकाऊ खेती के मॉडल के रूप में काम करेंगी। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन के सड़क सुरक्षा अभियान के तहत 50 लोगों को हेलमेट वितरित किए और कृषि विश्वविद्यालय परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत आम का पौधा रोपा।

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