नई दिल्ली: भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले भूमि संसाधन विभाग (DoLR) ने बुधवार को डाक विभाग और राष्ट्रीय शहरी मामलों के संस्थान (NIUA) के साथ मिलकर एक विशेष समीक्षा बैठक की। इस बैठक का केंद्रीय एजेंडा देश के डिजिटल एड्रेसिंग फ्रेमवर्क के तहत यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULPIN) और DIGIPIN के बीच तकनीकी तालमेल स्थापित करना तथा दोनों प्रणालियों को आपस में एकीकृत करना था।
इस विमर्श सत्र का संचालन भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेंद्र भूषण की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस बैठक में नीतियों के क्रियान्वयन पर विचार करने के लिए संयुक्त सचिव (भूमि संसाधन) पी. नरहरि, डाक विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक गोकुल कुलपति तथा NIUA की निदेशक देबोलीना कुंडू सहित संबंधित तकनीकी और प्रशासनिक क्षेत्रों के कई वरिष्ठ नीति-निर्माता शामिल हुए।
चर्चा के दौरान इस बात पर प्रकाश डाला गया कि ULPIN और DIGIPIN एक-दूसरे की क्षमताओं को पूरा करने में सक्षम हैं। जहाँ एक तरफ ULPIN देश के सभी शहरी और ग्रामीण भूखंडों को एक अनूठी डिजिटल आईडी सौंपता है, वहीं दूसरी तरफ DIGIPIN सटीक भौगोलिक स्थिति की पहचान करने में मदद करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों का एकीकरण सरकारी विभागों के बीच डेटा के आदान-प्रदान को सरल बनाएगा, जिससे जनता तक सरकारी योजनाओं और सेवाओं की पहुंच अधिक प्रभावी हो सकेगी।
रणनीति को धरातल पर उतारने के लिए बैठक में तय किया गया कि जल्द ही इसके व्यावहारिक पहलुओं को जांचने के लिए प्रायोगिक (पायलट) परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, विभिन्न सरकारी पोर्टलों पर इसे आसानी से लागू करने के लिए एक ओपन और स्टैंडर्ड-बेस्ड एपीआई (API) ढांचा तैयार किया जाएगा। इस पहल से देश के इनोवेटर्स और स्टार्टअप्स को मदद मिलेगी, जिससे वे आम नागरिकों की सुविधा के लिए नए भू-स्थानिक एप्लीकेशन और डिजिटल उत्पाद विकसित कर सकेंगे।
तकनीकी एकीकरण की यह कवायद देश में भूमि प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप डिजिटल स्वरूप देने की ओर एक बड़ा कदम है। यह पहल सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ विजन को सुदृढ़ करती है, जिसका मुख्य ध्येय डिजिटल बदलाव, नवाचार और ओपन स्टैंडर्ड्स को प्रोत्साहित कर शासन व्यवस्था को सुगम बनाना है।