विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार देर रात एक आधिकारिक वक्तव्य जारी कर पश्चिम एशिया में हालिया सैन्य हमलों के कारण उपजे तनाव और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में वाणिज्यिक जहाजों को दोबारा निशाना बनाए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। भारत ने इस स्थिति को क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा बताते हुए सभी संबंधित पक्षों से तत्काल प्रभाव से संयम बरतने की अपील की है। नई दिल्ली ने तनाव को कम करने, आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा व्यापारिक गतिविधियों को बिना किसी बाधा के जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया है। भारत सरकार ने इस विवाद का एक शांतिपूर्ण और टिकाऊ हल निकालने के लिए बातचीत तथा कूटनीतिक प्रयासों को अपनाने का पुरजोर आग्रह किया है।
इस क्षेत्रीय टकराव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर देखा जा रहा है, जहां कच्चे तेल के दामों में भारी तेजी आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 6.52 फीसदी (4.69 डॉलर) के उछाल के साथ लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गईं। इसी प्रकार, अमेरिकी बाजार में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) तेल की कीमत में भी छह प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे यह तकरीबन 75 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर कारोबार करने लगा। भारत के लिए तेल की कीमतों में यह अचानक आई तेजी आर्थिक दृष्टिकोण से एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है।
इसी बीच, अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया। नाटो महासचिव मार्क रूटे और बाद में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ द्विपक्षीय वार्ताओं के दौरान ट्रंप ने ईरान पर अमेरिका द्वारा दिए गए अस्थायी संघर्षविराम के उल्लंघन का सीधा आरोप लगाया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि तेहरान ने अपनी आक्रामक कार्रवाइयां बंद नहीं कीं, तो वाशिंगटन आगे भी सैन्य कदम उठाने और समुद्री नाकेबंदी लागू करने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अब वार्ता की प्रासंगिकता कम हो गई है, हालांकि उनके अधिकारी इस दिशा में बातचीत जारी रख सकते हैं।
ट्रंप ने पूर्व के घटनाक्रमों का हवाला देते हुए कहा कि ईरानी पक्ष ने उनसे अनुरोध किया था कि अंतिम संस्कार के आयोजनों के दौरान उन पर कोई कार्रवाई न की जाए। अमेरिका ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए उनके लिए सुरक्षित माहौल भी प्रदान किया, लेकिन इसके बावजूद ईरान ने दोबारा हमले शुरू कर दिए और जहाजों पर रॉकेट दागे। अमेरिकी राष्ट्रपति के अनुसार, इसके जवाब में अमेरिका ने इस बार 20 गुना अधिक क्षमता के साथ बेहद कड़ा सैन्य पलटवार किया है। उन्होंने साफ किया कि हर ईरानी हमले का उसी तीव्रता के साथ जवाब दिया जाएगा।
जब ट्रंप से यह सवाल किया गया कि क्या ये घटनाएं एक बड़े युद्ध की शुरुआत हैं, तो उन्होंने इसका कोई सीधा उत्तर तो नहीं दिया, लेकिन आने वाले समय में और हमलों की आशंका से इनकार भी नहीं किया। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिकी सेना उसी रात दोबारा जवाबी कार्रवाई कर सकती है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी सशस्त्र बलों को निर्देश दिए हैं कि वे ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाइयों के दायरे को और विस्तृत करें।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सैन्य कमांडरों को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि वे पाइपलाइनों को छोड़कर ईरान के सबसे बड़े तेल निर्यात केंद्र ‘खार्ग द्वीप’ पर स्थित अन्य सभी ठिकानों को अपना निशाना बनाएं। इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि करते हुए अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बताया कि अमेरिकी बलों ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए निरंतर खतरा पैदा कर रहे थे।