संविधान और पूर्ण पारदर्शिता के साथ काम करता है निर्वाचन आयोग, भ्रामक प्रचार पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने जताई चिंता

संविधान और पूर्ण पारदर्शिता के साथ काम करता है निर्वाचन आयोग, भ्रामक प्रचार पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने जताई चिंता

नई दिल्ली में बुधवार को भारतीय निर्वाचन आयोग की ओर से मीडिया और कम्युनिकेशन अधिकारियों के लिए एक विशेष एक दिवसीय सम्मेलन का आयोजन संपन्न हुआ। चुनावी संचार व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा डिजिटल युग में झूठी खबरों के बढ़ते खतरे पर लगाम लगाने के मकसद से आयोजित इस कार्यक्रम में 10 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 200 अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में राज्यों के सूचना एवं जनसंपर्क विभागों के आला अधिकारियों सहित जिला स्तर के जनसंपर्क पदाधिकारियों, जिला मीडिया नोडल अधिकारियों और सोशल मीडिया प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे नोडल अफसरों ने हिस्सा लिया। इस बैठक का ढांचा चुनावी सूचनाओं के सुचारू प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया गया था।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग का प्रत्येक कदम देश के संविधान, स्थापित चुनावी कानूनों और समय-समय पर जारी होने वाले वैधानिक लिखित निर्देशों के तहत ही उठाया जाता है। उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता और समय पर सटीक सूचनाओं के आदान-प्रदान को बेहद जरूरी बताया।

ज्ञानेश कुमार ने अधिकारियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैलाए जाने वाले गलत नैरेटिव के प्रति आगाह किया। उन्होंने कहा कि भ्रामक सूचनाओं के नेटवर्क को तोड़ने के लिए अग्रिम और सक्रिय प्रयास करने होंगे। लोकतांत्रिक संस्थाओं में जन-विश्वास का जिक्र करते हुए उन्होंने हालिया विधानसभा चुनावों में हुए ऐतिहासिक मतदान को इसका सबसे बड़ा प्रमाण बताया, जो देश की चुनावी प्रणाली में आम नागरिकों के भरोसे को दर्शाता है।

सत्र को संबोधित करते हुए चुनाव आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने तकनीक के गलत इस्तेमाल पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में डीपफेक, सिंथेटिक मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए तैयार की जा रही भ्रामक सामग्री का सीधा उद्देश्य देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति जनता में अविश्वास पैदा करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे आयोग के तय नियमों और दिशा-निर्देशों के दायरे में रहकर ऐसी ताकतों को नाकाम करें।

जारी आधिकारिक विवरण के मुताबिक, इस कॉन्फ्रेंस में मतदाता सूची के सुधार से लेकर मतदान संपन्न होने तक के पूरे चक्र की संचार नीति पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान अधिकारियों को संवैधानिक प्रावधानों और मीडिया रेगुलेशन से जुड़े कानूनों की जानकारी दी गई। व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्रों में बेहतरीन प्रेस विज्ञप्ति तैयार करने, सोशल मीडिया पर आधिकारिक सूचनाओं का प्रसार करने और इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब के माध्यम से युवाओं को जोड़ने के गुर सिखाए गए। साथ ही, वोटर लिस्ट निर्माण और मतगणना की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया गया।

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