अमरनाथ यात्रा 2026: पवित्र गुफा में मत्था टेकने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 1.60 लाख के पार, जम्मू से नया जत्था रवाना

अमरनाथ यात्रा 2026: पवित्र गुफा में मत्था टेकने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 1.60 लाख के पार, जम्मू से नया जत्था रवाना

जम्मू-कश्मीर में जारी वार्षिक अमरनाथ यात्रा के तहत अब तक 1 लाख 60 हजार से अधिक तीर्थयात्री बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। आगामी 28 अगस्त तक चलने वाली इस धार्मिक यात्रा की शुरुआत इसी महीने 3 जुलाई 2026 को हुई थी। इसी क्रम में शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा के बीच 8,796 श्रद्धालुओं का एक और नया जत्था जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से कश्मीर घाटी के लिए रवाना किया गया।

प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह तड़के भगवती नगर यात्री निवास से नौवें जत्थे को घाटी की ओर रवाना किया गया। सुरक्षा बलों की निगरानी में निकले इस काफिले में से 3,350 तीर्थयात्री सुबह करीब 2:42 बजे बालटाल बेस कैंप के लिए रवाना हुए। इसके बाद, सुबह 3:24 बजे 5,346 श्रद्धालुओं का दूसरा सुरक्षा काफिला नुनवान (पहलगाम) आधार शिविर के लिए निकला। इस पूरे जत्थे में 6,426 पुरुष, 2,042 महिलाएं, 228 साधु, 10 बच्चे और 33 विदेशी नागरिक शामिल हैं।

इस जत्थे की सुरक्षित आवाजाही के लिए प्रशासन द्वारा कुल 354 वाहनों का प्रबंध किया गया था। इनमें 175 बसें, 70 मध्यम मोटर वाहन, 106 हल्के मोटर वाहन और तीन दोपहिया वाहन शामिल थे। यात्रा के दोनों मार्गों को ध्यान में रखते हुए 173 वाहनों को बालटाल रूट के लिए और 181 वाहनों को पहलगाम रूट के लिए मुस्तैद किया गया था।

इस बीच, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गुरुवार को श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र में स्थित पंथा चौक यात्री कैंप का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि शुरुआती एक सप्ताह के आंकड़े दर्शाते हैं कि इस वर्ष अमरनाथ यात्रा में शिरकत करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पिछले साल की तुलना में काफी अधिक है। यह वृद्धि न केवल हमारी आध्यात्मिक मान्यताओं को सुदृढ़ करती है, बल्कि जम्मू-कश्मीर के पर्यटन क्षेत्र और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद लाभकारी संकेत है।

उपराज्यपाल ने स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि वह चाहते हैं कि प्रदेश के उत्कृष्ट हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पाद देश के कोने-कोने तक पहुंचें। हर श्रद्धालु के माध्यम से यह अनूठी विरासत उनके घरों का हिस्सा बने, जिससे स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन मिलेगा और ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) अभियान की परिकल्पना साकार होगी। उन्होंने व्यवस्थाओं में जुटे जिला प्रशासन, श्राइन बोर्ड, पुलिस, सुरक्षा बलों और सभी विभागों के आपसी तालमेल की सराहना की। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया कि सुगम पंजीकरण और भीड़ नियंत्रण के लिए वे लगातार सतर्क रहें।

उल्लेखनीय है कि समुद्र तल से 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस पवित्र गुफा मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु पारंपरिक पहलगाम मार्ग या अपेक्षाकृत छोटे बालटाल मार्ग का चयन करते हैं। पहलगाम के रास्ते पवित्र गुफा तक पहुंचने में चार दिनों का समय लगता है, जबकि बालटाल मार्ग से तीर्थयात्री बाबा बर्फानी के दर्शन कर उसी दिन वापस लौट आते हैं। इस वर्ष की यात्रा का समापन 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के पावन अवसर पर होगा।

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