भारतीय एथलीटों को मिलेंगी विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं: स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर और भारतीय खेल प्राधिकरण के बीच ऐतिहासिक समझौता

भारतीय एथलीटों को मिलेंगी विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं: स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर और भारतीय खेल प्राधिकरण के बीच ऐतिहासिक समझौता

नई दिल्ली में शुक्रवार को देश के शीर्ष एथलीटों और उनके सहायक कर्मचारियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह साझेदारी स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन संचालित सफदरजंग अस्पताल के स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर (SIC) तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के बीच हुई है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव और खेल सचिव हरि रंजन राव की गरिमामयी उपस्थिति में हुए इस समझौते का मुख्य उद्देश्य खिलाड़ियों की चोटों के उपचार, रोकथाम, पुनर्वास और खेल विज्ञान से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाना है।

इस रणनीतिक गठबंधन के अंतर्गत स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर की विशेषज्ञ चिकित्सा टीम और भारतीय खेल प्राधिकरण के व्यापक एथलीट सपोर्ट नेटवर्क को एक मंच पर लाया जाएगा। इस एकीकरण से एक ऐसा समग्र और सुव्यवस्थित स्वास्थ्य मॉडल तैयार होगा, जो खिलाड़ियों को चोटों से बचाने, उनकी सटीक जांच करने, त्वरित इलाज और बेहतर पुनर्वास की सुविधाएं सुनिश्चित करेगा। इस व्यवस्था से देश के खिलाड़ी लंबे समय तक शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट रहकर मैदान पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकेंगे।

चिकित्सा के साथ-साथ यह साझेदारी खेल विज्ञान, शोध और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में भी नए आयाम स्थापित करेगी। दोनों संस्थान मिलकर खेल चिकित्सा और प्रशिक्षण से जुड़ी वैज्ञानिक प्रणालियों को उन्नत करेंगे। इसके अलावा, साक्ष्य-आधारित उपचार पद्धतियों को विकसित करने और खेल के दौरान लगने वाली चोटों से बचाव के आधुनिक तरीके खोजने के लिए संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं का संचालन किया जाएगा।

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि यह समझौता भारत को खेल महाशक्ति बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो स्वास्थ्य और खेल जगत के बीच एक टिकाऊ और दीर्घकालिक रिश्ते की नींव रखेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि स्वास्थ्य मंत्रालय देश में स्पोर्ट्स मेडिसिन के बुनियादी ढांचे के विस्तार, उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने और इस क्षेत्र में विशेषज्ञों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास करेगा। एथलीटों की विशिष्ट मानसिक व स्वास्थ्य आवश्यकताओं के लिए भविष्य में निमहंस (NIMHANS) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का सहयोग लेने की बात भी उन्होंने कही।

स्वास्थ्य सचिव ने यह भी सुझाव दिया कि देश में नवनिर्मित एम्स (AIIMS) संस्थानों में भी स्पोर्ट्स मेडिसिन विभाग विकसित किए जाने चाहिए ताकि खिलाड़ियों को हर क्षेत्र में प्राथमिकता के आधार पर इलाज मिल सके। उन्होंने ऐसे व्यावहारिक शोध कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता बताई, जो सीधे तौर पर भारतीय खिलाड़ियों की खेल क्षमता को बढ़ाने और देश में खेल चिकित्सा को एक नई पहचान दिलाने में मददगार साबित हों।

वहीं, खेल विभाग के सचिव हरि रंजन राव ने एक महत्वपूर्ण बिंदु की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि वर्तमान में खेल विज्ञान और चिकित्सा के अधिकांश मानक पश्चिमी देशों के डेटा पर आधारित हैं, जो भारतीय खिलाड़ियों की शारीरिक संरचना और परिस्थितियों के अनुकूल नहीं बैठते। उन्होंने भारत के अपने घरेलू शोध, वैज्ञानिक साक्ष्य और विशेष प्रोटोकॉल तैयार करने की वकालत की ताकि एथलीटों के प्रदर्शन सुधार और चोटों के बाद उनके पुनर्वास के अधिक सटीक परिणाम मिल सकें।

इसके साथ ही खेल सचिव ने देश के चिकित्सा महाविद्यालयों को खेल विज्ञान की मुख्यधारा से जोड़ने की आवश्यकता जताई। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि भारतीय खेल प्राधिकरण के देशव्यापी उत्कृष्टता केंद्रों को उनके नजदीकी मेडिकल कॉलेजों के साथ संबद्ध किया जाना चाहिए। इससे जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी, आधुनिक अनुसंधान और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण का सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने इस पूरी पहल को एथलीटों के उज्ज्वल भविष्य के लिए बेहद कल्याणकारी बताया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *