प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने छह दिवसीय विदेश दौरे के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड के ऑकलैंड शहर में आयोजित एक भव्य सामुदायिक समारोह के दौरान भारतीय प्रवासियों को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में उन्होंने दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और तकनीकी संबंधों को रेखांकित करते हुए भारत और न्यूजीलैंड की साझा विविधताओं व प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला।
मंच पर प्रधानमंत्री के आगमन के साथ ही पूरा सभागार दर्शकों के उत्साहपूर्ण नारों और करतल ध्वनि से गूंज उठा। प्रवासी भारतीयों के प्रति अपना स्नेह व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि भौगोलिक रूप से सुदूर देश में निवास करने के बावजूद प्रवासियों का आत्मिक जुड़ाव सदैव अपनी मातृभूमि भारत से बना रहता है। उन्होंने देश के प्रति प्रवासियों के इस लगाव की सराहना करते हुए कहा कि प्रवासी नागरिक वैश्विक स्तर पर देश के सच्चे दूत हैं।
सभ्यतागत निरंतरता का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि भारत अपनी हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता की प्राचीन विरासतों को सहेजते हुए आधुनिक बदलावों को अपनाने में हमेशा अग्रणी रहा है, क्योंकि हमारी संस्कृति निरंतर सीखते रहने की ललक पर आधारित है। उन्होंने न्यूजीलैंड द्वारा इतिहास में सबसे पहले महिलाओं को मताधिकार दिए जाने के ऐतिहासिक फैसले की सराहना करते हुए कहा कि दोनों ही देश आज महिला नेतृत्व वाले विकास और महिला सशक्तीकरण को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे नए अवसरों के द्वार खुल रहे हैं।
कृषि क्षेत्र में न्यूजीलैंड के मॉडल की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वहाँ के ग्रामीण इकोसिस्टम ने छोटे किसानों को वैश्विक स्तर पर बड़े ब्रांड में बदलने की राह दिखाई है, जो भारत के छोटे जोत वाले किसानों के लिए एक बड़ी सीख है। उन्होंने न्यूजीलैंड के प्रसिद्ध ‘मानुका हनी’ (शहद) को लिक्विड गोल्ड बताते हुए उसकी तुलना भारतीय आयुर्वेद में शहद के महत्व से की। उन्होंने बताया कि भारत में भी राष्ट्रीय स्तर पर मधुमक्खी पालन मिशन के माध्यम से शहद उत्पादन में क्रांतिकारी वृद्धि हो रही है, विशेषकर हिमालय की ऊंचाइयों से आने वाला शहद अत्यंत मूल्यवान साबित हो रहा है।
खेल और अंतरिक्ष के मोर्चे पर साझेदारी का जिक्र करते हुए उन्होंने दोनों देशों के बीच हॉकी के सौ साल पुराने ऐतिहासिक संबंधों और मेजर ध्यानचंद के अविस्मरणीय योगदान को याद किया। इसके साथ ही उन्होंने रग्बी के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के लिए भुवनेश्वर में चल रहे संयुक्त कोचिंग कार्यक्रमों और ऑल ब्लैक्स टीम की हालिया जीत की सराहना करते हुए कहा कि भारत रग्बी में न्यूजीलैंड की विशेषज्ञता से लाभ उठाना चाहता है। अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत के चंद्रयान मिशन की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर हुई ऐतिहासिक सफलता में न्यूजीलैंड की तकनीकी कंपनियों के योगदान को सराहते हुए उन्होंने कहा कि यह समन्वय दोनों देशों के आर्थिक और व्यापारिक समझौतों की उस भावना को बल देता है जो भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में अग्रसर कर रही है।
माओरी समुदाय के प्रति आदर व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने उनके पारंपरिक नृत्य ‘हाक्का’ की ऊर्जा, साहस और पूर्वजों के प्रति सम्मान की भावना की प्रशंसा की। उन्होंने माओरी दर्शन के ‘मनाकितांगा’ (अतिथि सत्कार), ‘फानो’ (संयुक्त परिवार) और ‘काइत्या कितांगा’ (प्रकृति संरक्षण) जैसे विचारों की तुलना भारतीय आदर्शों ‘अतिथि देवो भवः’ और ‘माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः’ से की। उन्होंने अंत में कहा कि प्रवासी भारतीय जिस निष्ठा से अपनी जन्मभूमि की प्रगति पर बारीक नजर रखते हैं, उतनी ही कर्मठता से अपनी कर्मभूमि के विकास में भी बहुमूल्य योगदान देते हैं।