वैश्विक संकटों और यूएनएससी में भारत की दावेदारी को लेकर विदेश मंत्री जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव से की अहम वार्ता

वैश्विक संकटों और यूएनएससी में भारत की दावेदारी को लेकर विदेश मंत्री जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव से की अहम वार्ता

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात कर वैश्विक मोर्चे पर जारी गंभीर संकटों पर विस्तृत चर्चा की। इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य रूप से पश्चिम एशिया, यूक्रेन और सूडान के मौजूदा हालातों पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया। इसके साथ ही भारत ने वर्ष 2028-2029 के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में अस्थायी सदस्यता के लिए अपनी दावेदारी का औपचारिक शंखनाद कर दिया है। यह बैठक अगले वर्ष होने वाले चुनावों से पहले संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राष्ट्रों का समर्थन जुटाने की नई दिल्ली की कूटनीतिक रणनीतियों की शुरुआत का एक प्रमुख हिस्सा है।

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में हुई इस मुलाकात के संदर्भ में विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के सेक्रेटरी जनरल एंटोनियो गुटेरेस के साथ हुई बातचीत बेहद सकारात्मक रही। इस दौरान पश्चिम एशिया, सूडान और यूक्रेन सहित विश्व की प्रमुख समसामयिक घटनाओं पर विमर्श हुआ। इसके अलावा, भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच निरंतर मजबूत होते आपसी सहयोग की भी सराहना की गई।

इस बैठक से पूर्व, विदेश मंत्री ने सुरक्षा परिषद में भारत की उम्मीदवारी की औपचारिक प्रस्तुति दी। इस मौके पर उन्होंने ‘शांति’ की अवधारणा पर आधारित छह-सूत्रीय विज़न को दुनिया के सामने रखा, जिसका मुख्य उद्देश्य नियमों, विश्वसनीयता और पारदर्शिता के माध्यम से समग्र प्रगति को बढ़ावा देना है। दुनिया भर के राजनयिकों को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत सुरक्षा परिषद में ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) के हितों की मुखर आवाज बनेगा। उन्होंने वैश्विक शांति अभियानों में भारत के योगदान और बहुपक्षीय व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के प्रयासों को भी रेखांकित किया।

भारत के इस छह-सूत्रीय ‘शांति’ दृष्टिकोण में कई महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं को शामिल किया गया है। इसके तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकासशील देशों की भूमिका को सशक्त बनाना और एक समावेशी, लोकतांत्रिक व प्रभावी बहुपक्षीय प्रणाली का निर्माण करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, आधुनिक तकनीक आधारित शांति-रक्षा ढांचे का विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रति मानव-केंद्रित दृष्टिकोण, अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुकूल स्वतंत्र व खुले समुद्री मार्ग का समर्थन और आतंकवाद व टेरर फाइनेंसिंग के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को तेज करना इसकी मुख्य प्राथमिकताएं हैं।

विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत का रुख हमेशा संवाद, आपसी सहयोग और मतभेदों को सुलझाने पर केंद्रित रहेगा। भारत ऐसे सुधारों का पक्षधर है जो वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप हों। उन्होंने शांति-रक्षा अभियानों को उनके मूल उद्देश्यों तक सीमित रखने और ‘महिला, शांति और सुरक्षा’ के एजेंडे को मजबूती से आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।

उल्लेखनीय है कि भारत अगले वर्ष संयुक्त राष्ट्र महासभा में वर्ष 2028-2029 के कार्यकाल के लिए एशिया-पैसिफिक क्षेत्र की गैर-स्थायी सीट के लिए चुनावी मैदान में उतरेगा। यदि भारत को इस चुनाव में सफलता मिलती है, तो 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में यह देश का नौवां कार्यकाल होगा। एक तरफ जहां नई दिल्ली सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता और बड़े सुधारों की अपनी दीर्घकालिक मांग पर अडिग है, वहीं दूसरी तरफ वह अस्थायी सीट के लिए भी सक्रिय है ताकि वैश्विक शांति से जुड़े निर्णयों में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका बनी रहे।

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