टोक्यो में सोमवार को भारत और जापान के बीच 8वें रक्षा नीति संवाद का आयोजन किया गया, जिसमें दोनों देशों ने कानून आधारित एवं स्वतंत्र हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने तथा आपसी रक्षा सहयोग को विस्तार देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने किया, वहीं जापानी दल की कमान अंतर्राष्ट्रीय मामलों के उप रक्षा मंत्री कानो कोजी के हाथों में रही। बैठक में क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और साझा सामरिक हितों पर व्यापक चर्चा हुई।
इस द्विपक्षीय वार्ता में पिछली बैठक के बाद से सैन्य और रक्षा मोर्चे पर हुई प्रगति की समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को भविष्य में और अधिक प्रगाढ़ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके अलावा, समकालीन क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को लेकर दोनों देशों के बीच सार्थक विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
संवाद के मुख्य एजेंडे में दोनों सेनाओं के बीच संपर्क बढ़ाने, संयुक्त मुख्यालयों के स्तर पर सहयोग स्थापित करने, समुद्री सुरक्षा सुदृढ़ करने और रक्षा अभ्यासों को गति देने जैसे विषय शामिल रहे। क्षमता विकास, रक्षा उपकरणों के निर्माण और समुद्री प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में संस्थागत समन्वय को और मजबूत करने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने रक्षा संबंधों के बढ़ते दायरे की सराहना की तथा नियमित अंतराल पर उच्च स्तरीय संवाद बनाए रखने की बात कही। साथ ही, इस वर्ष के उत्तरार्ध में प्रस्तावित 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता और अन्य आगामी दौरों के रोडमैप पर भी विचार-विमर्श किया गया।
भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए, भारत और जापान ने रक्षा उद्योग, तकनीकी नवाचार, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग के नए रास्ते तलाशने का निर्णय लिया। अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान पर आधारित एक सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए मिलकर काम करने की बात दोहराई गई। दोनों पक्षों ने वैश्विक पटल पर उभरी सुरक्षा चुनौतियों पर दोनों देशों के बीच बढ़ते सामंजस्य की सराहना की।
मुख्य वार्ता से पहले रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइज़ुमी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की तरफ से जापानी रक्षा मंत्री को शुभकामनाएं दीं और उन्हें भारत आने का न्योता दिया। इस बैठक में भी दोनों पक्षों ने आपसी रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने के संकल्प को दोहराया।
अपनी टोक्यो यात्रा के आरंभ में भारतीय रक्षा सचिव ने जापान के आत्मरक्षा बलों के स्मारक पर जाकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को नमन किया और वहां पुष्पचक्र अर्पित किया। यह दौरा भारत और जापान के बीच प्रगाढ़ होते रक्षा संबंधों तथा क्षेत्र की शांति व स्थिरता के प्रति दोनों देशों की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।