राजस्थान में भारत-पाक सीमा के पास हाईवे-70 पर ट्राई का नेटवर्क टेस्ट, जियो और एयरटेल का प्रदर्शन बेहतर, बीएसएनएल और वीआई पिछड़े

राजस्थान में भारत-पाक सीमा के पास हाईवे-70 पर ट्राई का नेटवर्क टेस्ट, जियो और एयरटेल का प्रदर्शन बेहतर, बीएसएनएल और वीआई पिछड़े

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने राजस्थान में मुनाबाओ से तनोट के बीच स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग-70 पर मोबाइल नेटवर्क की स्थिति जानने के लिए जून 2026 में एक स्वतंत्र ड्राइव टेस्ट (IDT) आयोजित किया था, जिसके परिणाम अब सार्वजनिक कर दिए गए हैं। आगामी 3 जून 2026 को करीब 311.4 किलोमीटर लंबे इस सीमावर्ती मार्ग पर दूरसंचार कंपनियों के नेटवर्क का यह परीक्षण किया गया। इस विशेष जांच के दौरान देश की प्रमुख दूरसंचार कंपनियों—रिलायंस जियो (RJIL), भारती एयरटेल, सार्वजनिक क्षेत्र की बीएसएनएल और वोडाफोन आइडिया (VIL) की वॉयस कॉलिंग और इंटरनेट (डेटा) सेवाओं के वास्तविक समय (रियल-टाइम) के प्रदर्शन को परखा गया।

नियामक संस्था ट्राई ने इस पूरी प्रक्रिया को अपने जयपुर क्षेत्रीय कार्यालय की प्रत्यक्ष देखरेख में एक अधिकृत एजेंसी के माध्यम से संपन्न कराया। 311.4 किलोमीटर लंबे इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर नेटवर्क की गुणवत्ता मापने के लिए सुंद्रा, म्याजलार, गुंजनगढ़, बंधा, लोंगेवाला और सधावाला जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल किया गया था। इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य कॉल स्थापित होने की सफलता दर, कॉल ड्रॉप की बारंबारता, नेटवर्क की पहुंच (कवरेज), डेटा के डाउनलोड व अपलोड की गति (स्पीड), लेटेंसी और कॉल के दौरान आवाज गायब (साइलेंस) होने जैसे बेहद महत्वपूर्ण तकनीकी मानकों की निष्पक्ष जांच करना था।

जांच रिपोर्ट के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, ऑटो-सेलेक्शन मोड (5जी, 4जी, 3जी और 2जी) पर नेटवर्क कवरेज के मामले में रिलायंस जियो ने अन्य कंपनियों की तुलना में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। कंपनी को 14,701 नमूनों में से केवल 881 जगहों पर कवरेज की कमी का सामना करना पड़ा। इसके विपरीत, एयरटेल के 14,130 नमूनों में से 5,728 स्थानों पर नेटवर्क गायब मिला। सरकारी कंपनी बीएसएनएल की स्थिति इस मोर्चे पर काफी कमजोर रही, जहां 10,174 सैंपल्स में से 8,509 जगहों पर सिग्नल नहीं थे, जबकि वोडाफोन आइडिया (वीआई) के 11,286 नमूनों में से 9,227 स्थानों पर कवरेज ब्लैकआउट दर्ज किया गया।

अगर कॉल ड्रॉप और गुणवत्ता के मानकों को देखें, तो यहां भी रिलायंस जियो का प्रदर्शन तुलनात्मक रूप से बेहतर पाया गया। परीक्षण के दौरान सफलता से कनेक्ट हुई कॉलों में से एयरटेल की 48 में से 10 कॉल बीच में ही कट गईं (कॉल ड्रॉप), वहीं बीएसएनएल की 6 में से 2 कॉल और जियो की 76 में से केवल 3 कॉल ड्रॉप हुईं। वोडाफोन आइडिया (वीआई) की बात करें तो उसकी 8 में से 1 कॉल ड्रॉप दर्ज की गई। कॉल के दौरान आवाज बंद होने (कॉल साइलेंस) के मामलों में एयरटेल की 32 कॉलों में से 4 में और बीएसएनएल की 7 में से 2 कॉलों में यह समस्या दिखी, जबकि जियो की 68 कॉलों में से 8 बार ऐसी स्थिति आई। इस रूट पर वीआई का 4जी या 5जी नेटवर्क उपलब्ध न होने के कारण उसके आंकड़े दर्ज नहीं किए जा सके।

इंटरनेट सेवाओं की गति (डेटा स्पीड) के मामले में अलग-अलग कंपनियों का दबदबा अलग-अलग मानकों पर रहा। रिलायंस जियो डेटा डाउनलोडिंग की गति में सबसे आगे रही, जहां उसकी औसत डाउनलोड स्पीड 55.05 Mbps मापी गई, जबकि भारती एयरटेल 42.83 Mbps की औसत गति के साथ दूसरे स्थान पर रही। इस मार्ग पर बीएसएनएल की औसत डाउनलोड गति 3.49 Mbps और वोडाफोन आइडिया की गति बेहद निराशाजनक महज 0.35 Mbps दर्ज की गई। हालांकि, जब बात डेटा अपलोड करने की आई, तो एयरटेल ने बाजी मार ली। एयरटेल की औसत अपलोड स्पीड 14.03 Mbps रही, जिसके बाद जियो 7.01 Mbps, बीएसएनएल 2.80 Mbps और वीआई 0.75 Mbps की गति ही दे पाई।

इस स्वतंत्र परीक्षण के नतीजों के बाद ट्राई ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान सामने आए सभी निष्कर्षों को संबंधित टेलीकॉम कंपनियों के साथ साझा कर दिया गया है, ताकि वे इस सीमावर्ती क्षेत्र में अपने बुनियादी ढांचे को सुधार सकें और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं दे सकें। नियामक ने यह भी साफ किया है कि यह रिपोर्ट केवल परीक्षण वाले दिन और समय पर उस विशेष हाईवे पर मौजूद नेटवर्क की स्थिति को दर्शाती है। इस संबंध में पूरी विस्तृत रिपोर्ट को ट्राई की आधिकारिक वेबसाइट पर आम जनता और हितधारकों के लिए उपलब्ध करा दिया गया है।

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