प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जल संरक्षण की दूरगामी सोच को धरातल पर उतारते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अगुवाई में मध्य प्रदेश में 19 मार्च से 30 जून तक ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ का संचालन किया गया। इस विशेष अभियान के तीसरे चरण के तहत प्रदेश के ग्रामीण और शहरी इलाकों में आम जनता की सक्रिय भागीदारी से जल स्रोतों के संरक्षण और सुधार के बड़े पैमाने पर कार्य किए गए। इसी सिलसिले में मंगलवार को जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मुलाकात कर उन्हें इस अभियान की विविध गतिविधियों और कार्यों की ब्यौरेवार जानकारी देने वाली एक विशेष पुस्तिका भेंट की। मुख्यमंत्री ने इस मुहिम की शानदार कामयाबी के लिए विभागीय टीम और मंत्री श्री सिलावट की सराहना की। इस दौरान विभाग के अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा भी वहां मौजूद रहे।
पहल के बारे में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा कि मध्य प्रदेश में पिछले तीन सालों से यह अभियान पूरी सफलता के साथ चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मॉनसून की आमद से पहले जल निकायों की साफ-सफाई, उनके पुनरुद्धार और जरूरी मरम्मत का काम पूरा किया गया, ताकि बारिश के मौसम में इन जल स्रोतों में अधिक से अधिक पानी इकट्ठा किया जा सके। इस पूरी कवायद में समाज के सभी तबकों को साथ जोड़ा गया, जिससे इसने एक व्यापक जनआंदोलन की शक्ल ले ली। इस साल इस राज्यव्यापी अभियान का आगाज 19 मार्च को इंदौर से हुआ था, जो लगातार 30 जून तक जारी रहा।
अभियान के तहत हुए कार्यों की रूपरेखा बताते हुए विभागीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि जल संसाधन विभाग ने अपने नियंत्रण वाले जल निकायों के आसपास की जमीन से अवैध कब्जों को हटाने को प्राथमिकता दी। इसके साथ ही नहरों की सफाई, उन्हें मजबूत करने और उनके सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया। पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए जल संरचनाओं के किनारों पर फेंसिंग लगाने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर पौधे रोपे गए। तालाबों की पिचिंग, बोल्डर टो, और घाटों को दुरुस्त करने का काम भी मुस्तैदी से किया गया।
इन विकास कार्यों की कड़ी में विभाग ने छोटी सिंचाई परियोजनाओं के फ्लशबार और स्लूस की मरम्मत के साथ ही स्टॉप डैम, बैराज, वियर और गेटों की मरम्मत के कार्य भी कराए। जलाशयों से होने वाले पानी के रिसाव (लीकेज) को रोकने के लिए भी आवश्यक तकनीकी सुधार किए गए। विभाग द्वारा इस पूरी अवधि में कुल 5,970 विकास कार्य पूरे किए गए हैं, जिनमें प्रदेश के सभी 9 बेसिनों (कछारों) में क्रियान्वित की गईं लघु सिंचाई परियोजनाओं के 531 महत्वपूर्ण कार्य भी शामिल हैं।