मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़वानी जिले के पाटी विकासखंड अंतर्गत बोकराटा सेक्टर में चलाए गए ‘मिशन ग्रीन कमांडो’ अभियान की जमकर प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हर अंतिम नागरिक तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। इस अभियान के तहत गुरुवार को प्रशासनिक तालमेल और जनसहभागिता के जरिए सुदूर वनांचल और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों तक चिकित्सा सेवाएं पहुंचाई गईं। मुख्यमंत्री ने इसके सफल क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य कर्मियों, प्रशासनिक अधिकारियों, स्वयंसेवकों और जनप्रतिनिधियों को बधाई दी और इसे दृढ़ इच्छाशक्ति का एक बड़ा उदाहरण बताया।
पाटी विकासखंड का बोकराटा सेक्टर राज्य के सबसे कठिन और दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों में गिना जाता है, जहां कई बस्तियां और फालिया ऊंची पहाड़ियों पर स्थित हैं। इन स्थानों तक पहुंचने के लिए कोई मोटर मार्ग उपलब्ध नहीं है और पैदल चलना ही एकमात्र रास्ता है। विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों के बीच ‘मिशन ग्रीन कमांडो’ के तहत स्वास्थ्य टीमों ने कई किलोमीटर की दूरी पैदल तय करके घर-घर दस्तक दी। इस प्रयास से सुदूर क्षेत्रों के निवासियों में शासन की स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति भरोसा और मजबूत हुआ है।
देश के आकांक्षी विकासखंड (एस्पिरेशनल ब्लॉक) में शामिल पाटी में आयोजित यह विशेष अभियान सुशासन और सेवा का एक नया मॉडल बनकर उभरा है। इस अभियान की सफलता के पीछे बड़वानी की कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह के मार्गदर्शन में तैयार की गई विस्तृत माइक्रो प्लानिंग थी। उनके सतत निरीक्षण में स्वास्थ्य, राजस्व और पंचायत विभाग सहित विभिन्न विभागों के बीच बेहतरीन समन्वय स्थापित किया गया। कठिन रास्तों को देखते हुए परिवहन, दवाइयों और मानव संसाधन की अग्रिम व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं।
इस बड़े मैदानी अभियान को अमलीजामा पहनाने के लिए लगभग 200 संयुक्त टीमें तैनात की गई थीं। प्रत्येक टीम में नोडल अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ), एएनएम, आशा कार्यकर्ता और वालंटियर्स शामिल थे। इन टीमों ने क्षेत्र की 9 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत आने वाले लगभग 2,500 घरों का दौरा किया और ग्रामीणों को व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कीं।
अभियान के दौरान बच्चों के शत-प्रतिशत टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण और प्रसवपूर्व जांच (एएनसी) पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके साथ ही सिकल सेल रोग की स्क्रीनिंग की गई और कुपोषित व कम वजन वाले बच्चों (सैम, मैम और एसयूडब्ल्यू) की पहचान की गई। 4D समूह यानी गर्भवती महिलाओं, पांच वर्ष तक के बच्चों, किशोर-किशोरियों और वरिष्ठ नागरिकों की विशेष रूप से पहचान की गई ताकि उन्हें समय पर उपचार मिल सके। मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए ग्रामीणों को मेडिसिन किट और ओआरएस के पैकेट बांटे गए, साथ ही स्वच्छता, पोषण और सुरक्षित मातृत्व के प्रति जागरूक भी किया गया।
दुर्गम इलाकों तक टीमों को पहुंचाने के लिए प्रशासन द्वारा 10 बसों और करीब 100 सरकारी वाहनों का प्रबंध किया गया था। जहां तक सड़कें थीं, वहां तक वाहन गए और उसके आगे की यात्रा के लिए स्थानीय सरपंचों, सचिवों, पटवारियों और ग्रामीणों ने मोटरसाइकिलों व अन्य स्थानीय साधनों से सहयोग दिया। इसके बाद भी जहां रास्ते बंद थे, वहां स्वास्थ्य दलों ने कई किलोमीटर पैदल चलकर सुदूर बस्तियों तक अपनी पहुंच बनाई। यह अभियान प्रशासन की सटीक रणनीति और सामुदायिक सहयोग का एक प्रेरक उदाहरण बन गया है।