राष्ट्रीय बांध सुरक्षा समिति की बैठक: सुरक्षा मानकों में सुधार और समयबद्ध लक्ष्यों पर जोर

राष्ट्रीय बांध सुरक्षा समिति की बैठक: सुरक्षा मानकों में सुधार और समयबद्ध लक्ष्यों पर जोर

नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में शुक्रवार को केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के अध्यक्ष की अगुवाई में राष्ट्रीय बांध सुरक्षा समिति (एनसीडीएस) की 12वीं बैठक संपन्न हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक में बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने और तय समय में सुरक्षा उपायों को पूरा करने की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में 10 केंद्रीय मंत्रालयों व विभागों के प्रतिनिधियों, सात राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों, दो प्रमुख बांध सुरक्षा विशेषज्ञों सहित सभी राज्य बांध सुरक्षा संगठनों के प्रमुखों और विशेष आमंत्रित सदस्यों ने हिस्सा लिया।

सत्र की शुरुआत करते हुए केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष ने बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के तहत नियमों की अधिसूचना जारी होने, तकनीकी गाइडलाइंस के प्रकाशन और आवश्यक दस्तावेजों को तैयार करने के संबंध में अब तक हुई प्रगति का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। इसके साथ ही उन्होंने संकटकालीन प्रबंधन योजनाओं, विस्तृत सुरक्षा मूल्यांकनों, संचालन एवं रखरखाव (ओ एंड एम) नियमावलियों को तैयार करने तथा जोखिम आकलन से जुड़े अध्ययनों की रफ्तार बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।

सुरक्षा के मोर्चे पर उभरती समकालीन चुनौतियों का जिक्र करते हुए बैठक में जलाशयों के भीतर गाद (सिल्ट) जमा होने और बांधों की निरंतर निगरानी से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर गंभीर मंथन किया गया। समिति ने यह स्पष्ट किया कि इन नई चुनौतियों से निपटने के लिए राज्यों के बांध सुरक्षा संगठनों को प्रशासनिक और तकनीकी रूप से सुदृढ़ करना होगा। इसके अलावा, अधिनियम के प्रावधानों को समय पर लागू करने के लिए सभी हितधारकों के बीच आपसी समन्वय को और बेहतर बनाने की बात कही गई।

इस बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों और प्रस्तावों पर आम सहमति बनी। जल संरचनाओं के सामने आने वाले आधुनिक खतरों के मद्देनजर, विशिष्ट बांधों की सुरक्षा और निगरानी के लिए नए दिशानिर्देशों के निर्माण व सुरक्षा जांच सूची (चेकलिस्ट) में आवश्यक बदलावों को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में बांध सुरक्षा से जुड़े अध्याय को अंतिम रूप देने और जांच, डिजाइन, निर्माण व गुणवत्ता नियंत्रण के क्षेत्र में कार्यरत एजेंसियों को मान्यता देने की प्रक्रिया पर मुहर लगाई गई। बैठक में बांध विफलताओं की रिपोर्टिंग प्रणाली, जोखिम आधारित वर्गीकरण और आपातकालीन योजनाओं को अंतिम रूप देने का भी निर्णय लिया गया।

मानव संसाधन को कुशल बनाने के उद्देश्य से क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान केंद्रित करने की बात कही गई। इसके तहत आईआईटी रुड़की और आईआईएससी बेंगलुरु में चल रहे पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में विभागीय इंजीनियरों को नियमित तौर पर नामांकित करने की आवश्यकता जताई गई। इसके अतिरिक्त एनआईटी सूरत, एनआईटी कालीकट, एनआईटी नागपुर, एनआईटी गुवाहाटी और एनआईटी शिलांग जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों को भी इस क्षमता निर्माण अभियान का हिस्सा बनाने की संभावनाओं को टटोला गया। समिति ने बांध प्रबंधकों को निर्देश दिया कि वे तकनीकी और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर काम करें।

हाल के दिनों में सामने आईं बांधों से जुड़ी अप्रिय घटनाओं पर भी बैठक में विस्तार से तकनीकी समीक्षा की गई। संबंधित बांध प्रबंधन प्राधिकरणों द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट के आधार पर छत्तीसगढ़ के लुटी टैंक और राजाडेरा बांध, सिक्किम के तीस्ता स्टेज-III बांध, पंजाब के माधोपुर बैराज की स्थिति तथा राजस्थान के बीसलपुर बांध में चल रही जलाशय ड्रेजिंग (गाद निकालने) की गतिविधियों का बारीकी से विश्लेषण किया गया।

बैठक के अंतिम चरण में केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष ने सभी राज्य सरकारों और संबंधित विभागों को कड़े निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यापक बांध सुरक्षा मूल्यांकन, आपातकालीन कार्य योजना (ईएपी) तैयार करने और जोखिम का आकलन करने से जुड़े सभी लंबित कार्यों को दिसंबर 2026 की निर्धारित समय-सीमा के भीतर हर हाल में पूरा कर लिया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी संभावित खतरे को टाला जा सके।

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