केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में पेश किए गए एक लिखित वक्तव्य में बताया कि केंद्र सरकार ने बीते दो वर्षों में देश के पर्यटन तंत्र को सशक्त बनाने, डिजिटल विस्तार और नागरिक सुविधाओं में सुधार के लिए 5,756.62 करोड़ रुपए की लागत वाली 117 विकास परियोजनाओं को अपनी प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। इस व्यापक कदम का मूल ध्येय देश के प्रमुख पर्यटन केंद्रों का ढांचागत विकास करना, पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाना और पर्यटन क्षेत्र की समग्र वृद्धि दर को तेज करना है।
राज्य सरकारों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को यह आर्थिक सहायता अनेक प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रमों के जरिए दी जा रही है। इसमें स्वदेश दर्शन 2.0, चुनौती आधारित गंतव्य विकास, ‘प्रशाद’ योजना, केंद्रीय एजेंसियों को ढांचागत सहयोग और ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ (डीए-जुगा) जैसी योजनाएं शामिल हैं। इसके साथ ही, वर्ष 2024-25 के दौरान ‘राज्यों को पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता’ पहल के तहत विश्वस्तरीय पर्यटन स्थलों के निर्माण के लिए अतिरिक्त वित्तीय मदद पहुंचाई गई।
पर्यटकों को आधुनिक डिजिटल अनुभव देने के लिए ‘इंक्रेडिबल इंडिया डिजिटल प्लेटफॉर्म’ की शुरुआत की गई है। सितंबर 2024 में शुरू किया गया यह बहुभाषी पोर्टल एक ही स्थान पर फ्लाइट, होटल, बस, कैब बुकिंग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के स्मारकों के लिए ऑनलाइन टिकट उपलब्ध कराता है। डिजिटल अभियानों, आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल और डिजिटल इन्फ्लुएंसर्स के सहयोग से घरेलू और वैश्विक स्तर पर भारत के पर्यटन स्थलों का व्यापक प्रचार किया जा रहा है।
राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा देने वाली ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल के तहत भी कई प्रमुख गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। गणतंत्र दिवस पर आयोजित होने वाले ‘भारत पर्व’ के दौरान सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की सांस्कृतिक धरोहर का प्रदर्शन किया जाता है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय एकता दिवस 2025 के मौके पर गुजरात के एकता नगर में आयोजित विशेष कार्यक्रमों में भी पर्यटन मंत्रालय ने प्रमुखता से सहभागिता की।
सांस्कृतिक पर्यटन और आपसी मेलजोल को मजबूती देने के लिए मंत्रालय अपने संबद्ध संस्थानों की मदद ले रहा है। देश भर में फैले 21 होटल प्रबंधन संस्थानों (आईएचएम), आईआईटीटीएम, भारतीय पाक कला संस्थान (आईसीआई) और पर्यटन कार्यालयों के माध्यम से नियमित आधार पर छात्र विनिमय कार्यक्रम, अध्ययन दौरे, सांस्कृतिक उत्सव, क्षेत्रीय भोजन महोत्सव और भाषा शिक्षण की कक्षाएं आयोजित की जा रही हैं।
विदेशी पर्यटकों का आगमन बढ़ाने के उद्देश्य से विदेशी दूतावासों, राज्य सरकारों और निजी हितधारकों के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आक्रामक प्रचार रणनीति लागू की गई है। इसके लिए रोडशो, ट्रेड शो, मीडिया कैंपेन और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन सम्मेलनों में भागीदारी की जा रही है। यात्रा को सुगम बनाने के लिए 174 देशों के नागरिकों को नौ अलग-अलग श्रेणियों में ई-वीजा दिया जा रहा है। पर्यटकों के मार्गदर्शन और सुरक्षा के लिए 24/7 बहुभाषी हेल्पलाइन, प्रशिक्षित सुविधाकर्ताओं हेतु ‘आईआईटीएफसी’ कार्यक्रम और गाइडों के एकीकरण के लिए ‘आईआईटीजी’ प्रणाली कार्यरत है।
पर्यटन क्षेत्र में विविधता लाने के लिए आध्यात्मिक, ग्रामीण, जनजातीय, वेलनेस, चिकित्सा, साहसिक, एमआईसीई, विवाह और विरासत पर्यटन जैसे आला (niche) क्षेत्रों के लिए नीतियां बनाई जा रही हैं। एमआईसीई पर्यटन को गति देने के उद्देश्य से ‘मीट इन इंडिया’ और वैवाहिक पर्यटन के लिए ‘इंडिया सेज़ आई डू’ अभियान की शुरुआत की गई है। इसके अलावा, साहसिक खेलों में सुरक्षा मानक तय करने के लिए ‘मॉडल एडवेंचर टूरिज्म सेफ्टी फ्रेमवर्क’ भी जारी किया गया है।