जम्मू-कश्मीर में मौसम के बिगड़े मिजाज को देखते हुए बुधवार को लगातार चौथे दिन अमरनाथ यात्रा रोकनी पड़ी। सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने श्रद्धालुओं को बालटाल और नुनवान-पहलगाम के सुरक्षित पड़ावों पर रोक रखा है। मौसम विभाग (आईएमडी) द्वारा भारी बारिश, बादल फटने और बाढ़ की चेतावनी के चलते अमरनाथ जी के साथ-साथ माता वैष्णो देवी, शिव खोड़ी और मचैल माता की यात्राएं भी शनिवार शाम से ही बंद हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि गांदरबल जिले के बालटाल और अनंतनाग जिले के नंदीवान-पहलगाम मार्गों पर 18 जुलाई की शाम से ही एहतियातन आवाजाही बंद की गई है। हालांकि, 19 और 20 जुलाई को पंचतरणी में फंसे यात्रियों को दर्शन की छूट दी गई थी, लेकिन बुधवार को बारिश तेज होने के कारण पवित्र गुफा की ओर जाने वाले सभी रास्ते पूरी तरह बंद रहे। यात्रियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जब तक मौसम में सुधार नहीं होता और आधिकारिक सूचना नहीं मिलती, वे आगे की यात्रा न करें।
जम्मू से बेस कैंपों की ओर जाने वाला यातायात लगातार तीसरे दिन ठप रहने से भगवती नगर यात्री निवास और आसपास के शिविरों में 6,000 के करीब श्रद्धालु रुके हुए हैं। मौसम में सुधार न होता देख जम्मू में रुके 2,000 से अधिक श्रद्धालु अपने-अपने राज्यों के लिए वापस रवाना हो गए हैं। स्थानीय सामाजिक संगठनों ने गीता भवन और राम मंदिर में ठहरे सैकड़ों साधु-संतों और श्रद्धालुओं के लिए भोजन की नि:शुल्क व्यवस्था की है।
वर्तमान में नंदीवन-पहलगाम में 2,800 तीर्थयात्री यात्रा फिर से शुरू होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसके अलावा श्रीनगर, बालटाल और रामबन के चंदरकोट यात्री निवासों में भी सैकड़ों की संख्या में यात्री ठहरे हुए हैं। मौसम विभाग के अनुसार 24 जुलाई तक राज्य में मौसम खराब रहने की संभावना है। इस बीच, मंगलवार को किश्तवाड़ से सरथल माता मंदिर तक एक सांकेतिक छड़ी यात्रा परंपरा के अनुसार निकाली गई।
ज्ञात हो कि 3 जुलाई से प्रारंभ हुई यह पवित्र यात्रा 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन) पर समाप्त होगी। अब तक के 21 दिनों की अवधि में लगभग 3.91 लाख श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं।