केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में जानकारी दी है कि 2020 में लागू की गई अंतरिक्ष नीतियों के बाद भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। सरकार द्वारा अब तक 105 गैर-सरकारी संस्थाओं को मंजूरी प्रदान की जा चुकी है, जबकि इस क्षेत्र में कुल निजी निवेश 618.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है। सरकार सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए इस क्षेत्र के लिए एक मजबूत नियामक तंत्र का संचालन कर रही है।
राज्यसभा में प्रस्तुत आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में 187 मिलियन डॉलर का निजी निवेश दर्ज किया गया, और 14 जुलाई 2026 तक 105 निजी संस्थाओं को विभिन्न गतिविधियों के लिए प्राधिकृत किया गया। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि निजी निवेश में लगातार वृद्धि देखी जा रही है; जहां 2021-22 में यह 100.5 मिलियन डॉलर था, वहीं 2023-24 में बढ़कर 348.5 मिलियन डॉलर हुआ और 31 मार्च 2026 तक यह 618.5 मिलियन डॉलर की ऊंचाई पर पहुंच गया।
राष्ट्रीय सुरक्षा के विषय पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि निजी संस्थाओं के प्रस्तावों को IN-SPACe के सुरक्षा दिशा-निर्देशों और राष्ट्रीय हितों के मापदंडों पर परखने के बाद ही स्वीकृति दी जाती है। उन्होंने बताया कि निजी क्षेत्र के विस्तार को देखते हुए IN-SPACe सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल और दिशा-निर्देश तैयार कर रहा है, ताकि विकास और सुरक्षा में संतुलन बना रहे।
निजी उद्योग को संबल देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का ब्योरा देते हुए उन्होंने बताया कि भारतीय अंतरिक्ष नीति-2023 और एफडीआई नियमों में ढील जैसी नीतियां लागू की गई हैं। इसके अतिरिक्त, इसरो की प्रयोगशालाओं का रियायती दरों पर उपयोग, ₹1,000 करोड़ का वेंचर कैपिटल फंड, ₹500 करोड़ का तकनीक अधिग्रहण कोष, सीड फंड योजना और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से निजी उद्यमों को सहायता दी जा रही है।
अनुमोदन प्रक्रिया के विषय में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि IN-SPACe द्वारा 17 नए अंतरिक्ष स्टार्टअप्स को पूर्ण संचालन की अनुमति दी जा चुकी है। यह कदम देश में एक उन्नत तकनीक आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप कल्चर को मजबूती प्रदान कर रहा है।
वर्ष 2020 के बाद आए बदलावों को रेखांकित करते हुए डॉ. सिंह ने बताया कि 2014 में देश में मात्र एक पंजीकृत स्पेस-स्टार्टअप था, जिसकी संख्या आज 400 के पार हो चुकी है। इन निजी संस्थाओं ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन करते हुए 30 से अधिक उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित किया है और PSLV (POEM) प्लेटफॉर्म के जरिए 45 पेलोड्स का सफल प्रक्षेपण किया है।
वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती साख का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष उद्योग विदेशी पूंजी और वैश्विक साझेदारियों को आकर्षित कर रहा है। IN-SPACe वर्तमान में 45 से अधिक देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है। इसके साथ ही, अर्थ ऑब्जर्वेशन पीपीपी (EO-PPP) मॉडल के तहत भारत का पहला निजी पृथ्वी अवलोकन उपग्रह समूह विकसित किया जा रहा है, जिसमें ₹1,200 करोड़ के निजी पूंजी निवेश का संकल्प लिया गया है।