केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस (आईपीए) के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ उच्चस्तरीय बैठक के दौरान कहा कि केंद्र सरकार देश में एक नवप्रवर्तन (इनोवेशन) आधारित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी दवा उद्योग के निर्माण के लिए पूरी तरह से संकल्पबद्ध है। इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य देश के नागरिकों को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के साथ-साथ फार्मा क्षेत्र में तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देना था।
डॉ. शारविल पटेल की अध्यक्षता में आए आईपीए के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई इस बैठक की जानकारी केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। उन्होंने बताया कि इस दौरान उद्योग और सरकार के बीच अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी), नैदानिक परीक्षणों (क्लीनिकल रिसर्च) और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के क्षेत्र में निवेश बढ़ाने को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ।
बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र मिलकर काम करें ताकि भारतीय दवा उद्योग को वैश्विक मंच पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके। केंद्रीय मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि मोदी सरकार एक ऐसा वातावरण तैयार करने में जुटी है, जहाँ नवाचार को प्रोत्साहन मिले और साथ ही आम जनता पर इलाज का आर्थिक बोझ कम हो सके।
उल्लेखनीय है कि भारत का औषधि क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में गिना जाता है और यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किफायती जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने में अग्रणी भूमिका निभाता है। केंद्र सरकार वर्तमान में घरेलू स्तर पर निर्माण, वैज्ञानिक शोध और नए प्रयोगों को गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं चला रही है।
फार्मा और हेल्थकेयर क्षेत्र की विकास दर को दर्शाते हुए नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही के दौरान इस सेक्टर में 13.9 अरब डॉलर के कुल 65 व्यावसायिक सौदे निष्पादित किए गए। यदि इसमें से भारतीय फार्मा कंपनी द्वारा किए गए 11.8 अरब डॉलर के विशाल विदेशी अधिग्रहण को हटा भी दिया जाए, तब भी कुल सौदों के मूल्य में पिछली तिमाही की तुलना में 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
इसी अवधि के दौरान विलय और अधिग्रहण (एमएंडए) गतिविधियों में भी अभूतपूर्व तेजी देखी गई, जहाँ 13.2 अरब डॉलर मूल्य के 35 सौदे संपन्न हुए। सौदों की कुल संख्या में तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे कुल लेनदेन मूल्य अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया। इस कुल एमएंडए मूल्य में विदेशी संपत्तियों के अधिग्रहण की हिस्सेदारी 96 प्रतिशत रही।