2032 तक वैश्विक खिलौना बाजार में 5% हिस्सेदारी का लक्ष्य, केंद्र ने विशेष टास्क फोर्स गठित की

2032 तक वैश्विक खिलौना बाजार में 5% हिस्सेदारी का लक्ष्य, केंद्र ने विशेष टास्क फोर्स गठित की

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में आयोजित ‘टीम अप फॉर टॉयज: ड्राइविंग स्केल, इनोवेशन एंड एक्सपोर्ट्स’ कार्यक्रम के दौरान खिलौना क्षेत्र के लिए एक विशेष टास्क फोर्स बनाने की घोषणा की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2032 तक अंतरराष्ट्रीय खिलौना बाजार में भारत की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 5 प्रतिशत तक पहुंचाना है। यह कार्यक्रम उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) द्वारा आयोजित किया गया था।

नवगठित टास्क फोर्स मुख्य रूप से छह महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित रहेगी। इनमें भारत को वैश्विक वैल्यू चेन से जोड़ना, निर्माण क्षमता का विस्तार करना, आपूर्ति श्रृंखला की कमियों को दूर करना, कुशल कार्यबल की तैयारी, बेहतर डिजाइन व नवाचार को बढ़ावा देना तथा व्यापार में सुगमता सुनिश्चित करना शामिल है। इन रणनीतिक कदमों के माध्यम से देश के खिलौना उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जाएगा।

इस समागम के दौरान ‘टॉय सेक्टर प्लेबुक’ का भी विमोचन किया गया, जो निर्माताओं, स्टार्टअप्स, एमएसएमई, उद्यमियों और निवेशकों के लिए एक मार्गदर्शक का काम करेगी। इस प्लेबुक में खिलौना विनिर्माण तंत्र, वैल्यू चेन, गुणवत्ता के मापदंड, नियम-कानूनों के पालन, कौशल विकास, बौद्धिक संपदा अधिकार, निर्यात और नए उभरते बाजारों से जुड़ी हर अहम जानकारी विस्तार से दर्ज की गई है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि भारत का खिलौना क्षेत्र ‘विकसित भारत’ के निर्माण की दिशा में हमारी प्रगति का एक सजीव प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह उद्योग देश की सांस्कृतिक विरासत, रचनात्मकता और विनिर्माण क्षमता का बेहतरीन संयोजन पेश करता है। केंद्रीय मंत्री ने उद्योगपतियों से अपील की कि वे अपने उत्पादों के बड़े पैमाने पर निर्माण, टिकाऊ उत्पादन, नवाचार और निर्यात पर अधिक ध्यान दें।

सरकारी प्रयासों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि बीआईएस (BIS) गुणवत्ता प्रमाणन, क्लस्टर विकास योजनाओं और एमएसएमई व स्टार्टअप्स को दी जा रही सहायता से देश के भीतर खिलौना निर्माण को नई मजबूती मिली है। उन्होंने देश के निर्माताओं से आग्रह किया कि वे अत्याधुनिक तकनीकों का प्रयोग करते हुए ऐसे भारतीय ब्रांड बनाएं, जिनकी पूरी दुनिया में एक अलग पहचान बन सके।

इस दौरान डीपीआईआईटी की संयुक्त सचिव काजल ने आंकड़ों की जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में देश के भीतर 21,000 से अधिक एमएसएमई, 770 से ज्यादा डीपीआईआईटी मान्यता प्राप्त टॉय स्टार्टअप्स, करीब 50 टॉय क्लस्टर और 1,800 से अधिक बीआईएस लाइसेंस प्राप्त इकाइयां सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।

वहीं, ‘स्केल’ (SCALE) समिति के अध्यक्ष पवन गोयनका ने कहा कि भारत को खिलौना निर्माण का एक अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनाने की रणनीति तैयार की गई है। विश्व स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला में जो बदलाव आ रहे हैं, उनका फायदा उठाकर भारत 2032 तक वैश्विक बाजार में अपनी 5 फीसदी हिस्सेदारी का लक्ष्य जरूर हासिल कर लेगा। कार्यक्रम के समापन पर डीपीआईआईटी के संयुक्त सचिव सुमीत जरंगल ने सभी का आभार जताया और कहा कि भविष्य में हमारा ध्यान ऐसे खिलौनों पर होगा जो भारत में निर्मित, डिजाइन किए गए, नवप्रवर्तित और ब्रांडेड हों।

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