संसद के चालू सत्र के दौरान वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने मंगलवार को आंकड़े साझा करते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत ने 863.1 अरब डॉलर का कुल निर्यात दर्ज कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने संसद को सूचित किया कि हाल के वर्षों में संपन्न हुए द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौतों ने देश के निर्यात क्षेत्र को व्यापक विविधता प्रदान करने के साथ-साथ श्रम आधारित उद्योगों के विस्तार में अहम भूमिका निभाई है।
लोकसभा में प्रस्तुत इस रिपोर्ट के मुताबिक, बीते वित्त वर्ष में देश का वस्तु निर्यात 441.8 अरब डॉलर और सेवा निर्यात 421.3 अरब डॉलर रहा। इन दोनों क्षेत्रों के समन्वित विकास की वजह से भारत अपने कुल निर्यात के अब तक के सबसे उच्चतम आंकड़े को हासिल करने में सफल रहा।
प्रशासनिक स्तर पर सरकार वर्ष 2021 के बाद लागू हुए सभी करारों से मिलने वाले लाभों का नियमित लेखा-जोखा रख रही है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यूएई के साथ 1 मई 2022 से लागू सीईपीए समझौते के अंतर्गत अब तक 4.45 लाख सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए गए। इसके परिणामस्वरूप यूएई को निर्यात की जाने वाली एचएस 8-डिजिट टैरिफ लाइनें बढ़कर 8,053 हुईं, जिनसे 37.3 अरब डॉलर का राजस्व मिला। इसमें 6.7 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है।
ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए व्यापारिक समझौते (ईसीटीए) के अंतर्गत भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। समझौते के बाद से औसतन 45,527 प्रमाण पत्र प्रति वर्ष जारी किए जा रहे हैं, जबकि 2020-21 में यह आंकड़ा केवल 1,482 था। इस करार के तहत 7.2 अरब डॉलर मूल्य के सामान का निर्यात 5,668 श्रेणियों में हुआ, जिसमें 272 नई टैरिफ लाइनें जुड़ीं। इसके अतिरिक्त, मॉरीशस के साथ हुए सीईसीपीए के जरिए 1,956 सर्टिफिकेट का उपयोग कर 4,345 टैरिफ लाइनों के तहत 473 मिलियन डॉलर का व्यापार दर्ज हुआ, जो 20.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है।
पश्चिम एशियाई तथा यूरोपीय बाजारों में भी भारतीय पहुंच मजबूत हुई है। ओमान के साथ 1 जून 2026 से प्रभावी समझौते के बाद भारत के कुल निर्यात के 99.38 प्रतिशत हिस्से को शुल्क मुक्त प्रवेश मिला है। जून 2026 के एकल महीने में ही ओमान को 622.8 मिलियन डॉलर का निर्यात किया गया, जो मई 2026 से 54.7% और जून 2025 की तुलना में 189.6% अधिक है। वहीं अक्टूबर 2025 से लागू ईएफटीए समझौते से भारतीय निर्यात के 99.6 प्रतिशत हिस्से को लाभ मिल रहा है, जिसके तहत 7,885 प्रमाण पत्र स्वीकृत किए जा चुके हैं।
मंत्री ने अपने वक्तव्य में रेखांकित किया कि सरकार ने रणनीति के तहत टेक्सटाइल और लेदर जैसे अधिक रोजगार देने वाले क्षेत्रों को इन एफटीए के केंद्र में रखा है। यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ईएफटीए, ओमान, ब्रिटेन तथा न्यूजीलैंड के साथ समझौतों के माध्यम से घरेलू उद्योगों के हितों को सुरक्षित रखते हुए भारतीय निर्माताओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसरों को विस्तारित किया गया है।