केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने नीट यूजी काउंसलिंग 2026 के संबंध में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित कर अधिकारियों को काउंसलिंग प्रक्रिया को तकनीक-सक्षम, पारदर्शी और सुरक्षित रखने के निर्देश जारी किए। मंत्री ने कहा कि प्रवेश प्रक्रिया का हर स्तर अभ्यर्थियों के लिए सुलभ होना चाहिए और उनकी सहूलियत को ही सबसे ऊपर रखा जाना चाहिए।
इस बैठक में मेडिकल काउंसलिंग कमेटी की तैयारियों की चरणबद्ध समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री ने एमसीसी अधिकारियों को ताकीद की कि विद्यार्थियों के मन में उठने वाले सवालों और समस्याओं के त्वरित निवारण के लिए सक्रिय तंत्र काम करे, जिससे प्रक्रिया के प्रति अभ्यर्थियों का विश्वास और गहरा हो सके।
इस वर्ष काउंसलिंग को अधिक सुचारू और अभ्यर्थी-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से कई बड़े नीतिगत सुधार अमल में लाए जा रहे हैं। इसमें अभ्यर्थियों को बार-बार उपस्थित होने की बाध्यता से राहत देते हुए ‘वन-टाइम फिजिकल रिपोर्टिंग’ की सुविधा दी गई है, जबकि प्रमाण-पत्रों का सत्यापन ऑनलाइन माध्यम से होगा।
इसके साथ ही विशेष आवश्यकता वाले यानी बेंचमार्क दिव्यांगता श्रेणी के विद्यार्थियों के लिए व्यवस्थाओं को और अधिक सुलभ बनाया गया है। इन सभी सुधारों का मुख्य मकसद काउंसलिंग के समय को घटाना तथा छात्रों को होने वाली व्यावहारिक परेशानियों को समाप्त करना है।
बैठक के दौरान जेपी नड्डा ने आधुनिक तकनीक का अधिकतम और प्रभावी प्रयोग सुनिश्चित करने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि समय पर सटीक जानकारी उपलब्ध कराने के साथ-साथ शिकायत निवारण प्रणाली को इतना सक्षम बनाया जाए कि किसी भी गड़बड़ी या देरी की गुंजाइश न रहे।
स्वास्थ्य मंत्रालय का मानना है कि इन दूरगामी बदलावों से नीट यूजी 2026 की पूरी काउंसलिंग व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और पूरी तरह विद्यार्थियों पर केंद्रित होगी, जिससे चिकित्सा शिक्षा में प्रवेश प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बन सकेगी।