कर्नाटक के बागवानी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में एपीडा ने 30 जुलाई 2026 को नीलम और तोतापुरी आमों की पहली हवाई लदान मालदीव भेजने की सुविधा प्रदान की। यह पहला अवसर है जब राज्य की देर से तैयार होने वाली आम की किस्मों को इस तरह हवाई मार्ग से विदेशी बाजार में पहुंचाया गया है, जिससे भारत के आम निर्यात नेटवर्क को व्यापक मजबूती मिली है।
एपीडा के चेयरमैन अभिषेक देव ने इस पूरी निर्यात प्रक्रिया से जुड़ी किसान उत्पादक कंपनियों, निर्यातकों और कृषकों की सराहना की। उनके अनुसार, इस प्रकार के संगठित प्रयास भारतीय बागवानी उत्पादों को नए अंतरराष्ट्रीय बाजार दिलाने में मददगार सिद्ध होते हैं, जिससे विशेष रूप से देर से आने वाली किस्मों के लिए नए अवसर बनते हैं और किसानों को दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता मिलती है।
विशेषताओं की बात करें तो नीलम आम अपनी मिठास, सघन गूदे और पेय सामग्री में उपयोग के लिए विख्यात है। वहीं, तोतापुरी आम अपने विशिष्ट स्वरूप, खट्टे-मीठे स्वाद और खाद्य प्रसंस्करणीय बहुमुखी प्रतिभा के लिए पसंद किया जाता है। चूंकि इनकी कटाई जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के अंत तक होती है, इसलिए ये किस्में भारत के आम निर्यात सीजन को विस्तारित करने और पीक सीजन के बाद विदेशी मांग को पूरा करने में सक्षम हैं।
किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दृष्टि से यह पहल काफी प्रभावी रही। एफपीसी के माध्यम से इस प्रक्रिया में शामिल किसानों को पारंपरिक बाजार व्यवस्था की तुलना में 50 प्रतिशत से ज्यादा का सीधा वित्तीय फायदा मिला है। इस अनुभव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि गुणवत्तापूर्ण एकत्रीकरण और सीधा बाजार संपर्क किसानों की आर्थिक उन्नति की कुंजी है।
यह सफल निर्यात कर्नाटक के कृषि-व्यवसाय तंत्र में एक नया मोड़ साबित होगा, जिससे एफपीओ, एग्री-स्टार्टअप्स और निर्यातकों को निर्यात-उन्मुख खेती में उतरने का प्रोत्साहन मिलेगा। एपीडा वर्तमान में राज्य सरकारों और निजी हितधारकों के साथ मिलकर लॉजिस्टिक्स व बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने पर काम कर रहा है ताकि वैश्विक बाजारों में भारत के प्रीमियम फलों की साख और मजबूत हो सके।