मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रतिभावान छात्राओं को सम्मानित किया और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों पर विचार व्यक्त किए। इस दौरान सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, निजी टीवी चैनल के प्रतिनिधि नरेंद्र गोयल, बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी, विद्यार्थी और उनके अभिभावक मौजूद रहे।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में एक दौर ऐसा भी था जब तत्कालीन प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया था कि केंद्र से भेजी जाने वाली राशि का केवल 15 प्रतिशत ही आम जनता तक पहुँच पाता है। इसके अलावा पूर्व वित्त मंत्री और रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे एक अन्य प्रधानमंत्री भी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) जैसी आधुनिक व्यवस्था के पक्ष में नहीं थे। वहीं दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शून्य बैलेंस पर बैंक खाते खुलवाकर पारदर्शी व्यवस्था की नींव रखी, जिसके चलते आज विभिन्न योजनाओं का 100 प्रतिशत लाभ सीधे लाभार्थियों तक बिना किसी रुकावट के पहुँच रहा है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टीवी चैनल द्वारा आयोजित ‘स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप’ समारोह में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आईं टॉपर और मेधावी छात्राओं को प्रोत्साहन राशि और पुरस्कार देकर सम्मानित किया। उन्होंने रीवा की चांदनी विश्वकर्मा और खुशी राम सहित अन्य जिलों की टॉपर बेटियों की सराहना करते हुए कहा कि सीमित साधनों के बावजूद इन छात्राओं ने जो सफलता हासिल की है, वह बेहद सराहनीय है। उन्होंने सम्मानित होने वाली सभी बेटियों और उनके माता-पिता को बधाई दी।
विद्यार्थियों के भविष्य पर मार्गदर्शन देते हुए डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के युवाओं की सफलता पूरे प्रदेश की उपलब्धि है। युवाओं को केवल नौकरी पाने तक सीमित न रहकर खुद का उद्योग स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। भारत में प्राचीन काल से ही स्वावलंबन और स्व-अनुशासन की परंपरा रही है। राज्य की बड़ी आबादी अपने व्यापार और व्यवसाय से जुड़ी है, जबकि सरकारी सेवाओं में सीमित अवसर होते हैं। स्वयं का रोजगार शुरू कर जीवन को और बेहतर बनाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार विभिन्न सरकारी सेवाओं में महिलाओं को आरक्षण दे रही है। इसके साथ ही महिलाओं के नाम पर संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर छूट दी जा रही है और औद्योगिक क्षेत्र में भी बहनों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) और तकनीक के विषय पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक प्रधान और एक निशान’ की तर्ज पर देश में एक समान कानून व्यवस्था होनी चाहिए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई से किसी को डरने की आवश्यकता नहीं है। हर नए नवाचार का शुरुआत में विरोध होता है, लेकिन बाद में उसे अपना लिया जाता है। भारत की युवा प्रतिभाएँ नए प्रयोगों को अपनाने और देश के विकास में योगदान देने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं।