बुधवार को संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्षी सांसदों के भारी हंगामे और नारेबाजी के कारण लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की कार्यवाही एक बार फिर बाधित हो गई। सुबह 11 बजे बैठक शुरू होते ही विपक्षी दल के सदस्यों द्वारा लगातार की गई नारेबाजी के चलते दोनों सदनों की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।
लोकसभा की कार्यवाही सुबह आरंभ होते ही विपक्षी सांसदों के विरोध और नारेबाजी की भेंट चढ़ गई। परिस्थिति को देखते हुए पीठ ने सदन की बैठक को शुरू होने के कुछ ही देर बाद दोपहर 2 बजे तक के लिए मुल्तवी कर दिया।
उधर, राज्यसभा में सुबह 11 बजे विधायी प्रक्रिया के तहत विभिन्न मंत्रालयों के महत्वपूर्ण दस्तावेज पटल पर रखे गए। इसके बाद शून्यकाल आरंभ हुआ, जिसमें अभी कुछ ही सदस्य अपनी बात रख पाए थे कि विपक्षी सांसद हाथों में नारेबाजी वाले प्लेकार्ड लेकर सीटों से आगे आ गए। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदस्यों को अपनी सीटों पर जाने की सलाह देते हुए कहा कि तख्तियां लहराना नियमों के विरुद्ध है। हंगामा न थमने पर उन्होंने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
दोपहर 12 बजे जब राज्यसभा की कार्यवाही पुनः शुरू हुई, तो सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदस्यों से सदन संचालन में सहयोग की अपील करते हुए सख्त हिदायत दी। उन्होंने कहा, “मेरी आप सभी से दो स्पष्ट प्रार्थनाएं हैं—पहली, कोई भी सदस्य सदन के वेल में न आए और दूसरी, तख्तियों का प्रदर्शन न करे। यदि इन निर्देशों का उल्लंघन किया जाता है, तो मैं संबंधित सदस्य की बात नहीं सुनूंगा, न ही उसे बोलने का अवसर दूंगा और मुझे उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए विवश होना पड़ेगा।”
सभापति की इस कड़ी चेतावनी और अपील के बावजूद उच्च सदन में नारेबाजी का दौर जारी रहा। नतीजतन, शून्यकाल के साथ-साथ प्रश्नकाल की कार्यवाही भी पूरी तरह ठप हो गई। उल्लेखनीय है कि जारी मानसून सत्र के दौरान संसद के दोनों सदनों में लगातार यही स्थिति बनी हुई है और हंगामे के कारण विधायी कामकाज प्रभावित हो रहा है।