भारत और साइप्रस के बीच ‘प्रवासन एवं गतिशीलता समझौते’ को तेजी से पूरा करने की दिशा में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण वार्ता आयोजित की गई। निकोसिया में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में साइप्रस में भारत के उच्चायुक्त मनीष और साइप्रस के प्रवासन तथा अंतरराष्ट्रीय संरक्षण मामलों के उप मंत्री निकोलस ए. आयोनाइड्स ने हिस्सा लिया। दोनों पक्षों ने भारतीय पेशेवरों और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करते हुए कानूनी, सुरक्षित और कौशल-आधारित आवाजाही को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया।
निकोसिया स्थित भारतीय उच्चायोग द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस बैठक में उप मंत्री आयोनाइड्स के साथ प्रवासन मंत्रालय के स्थायी सचिव चारालाम्बोस रूसोस भी उपस्थित थे। चर्चा के दौरान भारतीय उच्चायुक्त मनीष ने साइप्रस की अर्थव्यवस्था और वहां के सामाजिक विकास में भारतीय कामगारों तथा कुशल पेशेवरों के उल्लेखनीय योगदान को रेखांकित किया।
वार्ता के दौरान साइप्रस में निवास कर रहे भारतीय नागरिकों के कल्याण, उनकी सुरक्षा और उनके साथ न्यायसंगत व्यवहार से जुड़े पहलुओं पर गंभीर मंथन हुआ। उच्चायुक्त ने वहां कार्यरत कुछ भारतीय कर्मचारियों के सामने आ रही व्यावहारिक समस्याओं को प्रमुखता से उठाया और उनके त्वरित व प्रभावी समाधान की आवश्यकता जताई।
द्विपक्षीय आवाजाही को सुगम और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से दोनों राष्ट्रों ने ‘इंडिया-साइप्रस माइग्रेशन एंड मोबिलिटी एग्रीमेंट’ को तय समय सीमा के भीतर अंतिम रूप देने पर सहमति व्यक्त की। इस समझौते को जल्द पूरा करने का लक्ष्य मई 2026 में साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडिस की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व द्वारा निर्धारित किया गया था।
बैठक के दौरान उप मंत्री निकोलस ए. आयोनाइड्स ने भरोसा दिलाया कि उनका मंत्रालय भारतीय कर्मचारियों की चिंताओं को दूर करने के लिए लगातार सहयोग देता रहेगा। इसके साथ ही, उन्होंने ‘नमस्ते साइप्रस 2026’ कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण स्वीकार करते हुए अपनी उपस्थिति की पुष्टि की। भारतीय उच्चायोग के अनुसार, यह वार्ता दोनों देशों के बीच मजबूत होते जन-केंद्रित संबंधों और साझा कूटनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाती है।