मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को छिंदवाड़ा से वर्चुअल माध्यम से सीहोर जिले के ‘बलराम कृषि महोत्सव’ में शामिल किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे ‘किसान कल्याण वर्ष’ के अंतर्गत सरकार सिंचाई, खाद-बीज, बिजली, कृषि यंत्रों के साथ-साथ फसल बीमा, किसान सम्मान निधि और ब्याज मुक्त ऋण की राशि सीधे किसानों के खातों में हस्तांतरित कर रही है।
किसानों को राहत देने वाले निर्णयों की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में मंजूर ‘कवच योजना’ उन किसानों की चिंता दूर करेगी, जो पुरानी गड़बड़ियों या जांच में विलंब के कारण सहकारी संस्थाओं से नया ऋण और शासकीय लाभ नहीं पा पा रहे थे। इसके अलावा, खातों को छह महीने के बजाय एक साल में पलटने की व्यवस्था लागू की गई है और ऋण चुकता करने के लिए 31 मार्च की बाध्यता हटा दी गई है, ताकि किसान अपनी सुविधा अनुसार भुगतान कर सकें।
उत्पादन और विपणन की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने एमएसपी और बोनस के साथ रिकॉर्ड 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा है। सोयाबीन किसानों को भावांतर योजना से संबल मिला है और पहली बार कोदो-कुटकी (श्रीअन्न) की खरीद एमएसपी पर बोनस के साथ की गई है। किसानों की आवश्यकता को देखते हुए मूंग खरीदी की सीमा को 25 फीसदी से बढ़ाकर 60 फीसदी कर दिया गया है। उन्होंने किसानों से आय बढ़ाने के लिए पशुपालन, मत्स्य पालन और दुग्ध उत्पादन जैसे क्षेत्रों को अपनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर राजस्व मंत्री करणसिंह वर्मा ने घोषणा की कि सरकारी परियोजनाओं, सड़कों या नहरों के लिए अधिगृहीत की जाने वाली कृषि भूमि पर किसानों को चार गुना क्षतिपूर्ति प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि राजस्व महाभियान एवं साइबर तहसील जैसे अभियानों के जरिए अब तक प्रदेश में एक करोड़ से अधिक पेंडिंग राजस्व प्रकरण निपटाए जा चुके हैं।
सीहोर के इस कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के सदस्य सीताराम यादव और जनपद अध्यक्ष नावड़ी बाई समेत कई जनप्रतिनिधि एवं विशाल जनसमूह मौजूद था।