पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने विशाखापत्तनम बंदरगाह प्राधिकरण में माल ढुलाई को तेज करने और यातायात की समस्या से निपटने के लिए एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। इसके तहत बंदरगाह परिसर के भीतर 334.89 करोड़ रुपये की लागत से एक आंतरिक फ्लाईओवर का निर्माण किया जाएगा।
मंगलवार को इस फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का समुद्री क्षेत्र आर्थिक प्रगति, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय विकास का एक मजबूत आधार बन चुका है। उन्होंने बताया कि मजबूत बुनियादी ढांचे, आधुनिक तकनीक, प्रगतिशील सुधारों और नौवहन क्षमता में निरंतर निवेश के बल पर देश में वैश्विक स्तर का और आत्मनिर्भर समुद्री तंत्र तैयार किया जा रहा है। यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्यों को हासिल करने में बेहद सहायक साबित होगी।
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि इस नए फ्लाईओवर के बनने से विशाखापत्तनम पोर्ट में आने-जाने वाले सामान की आवाजाही में हो रही देरी खत्म होगी। बंदरगाह की परिचालन क्षमता में सुधार आएगा और माल की निकासी तेजी से हो सकेगी। सरकार वैश्विक मानकों के अनुरूप एक सुगम और आधुनिक पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
3.584 किलोमीटर लंबा यह प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर कॉन्वेंट जंक्शन को सीधे डॉक क्षेत्र से जोड़ने का काम करेगा। इसके निर्माण से पोर्ट परिसर के अंदर चलने वाले सड़क और रेल यातायात को पूरी तरह अलग किया जा सकेगा, जिससे बंदरगाह के अंदर गाड़ियों और मालगाड़ियों की आवाजाही में कोई रुकावट नहीं आएगी।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य नौ प्रमुख रेलवे लेवल क्रॉसिंग पर लगने वाले जाम और देरी को समाप्त करना है। वर्तमान में ट्रेनों की बार-बार आवाजाही के कारण इन रेलवे फाटकों को दिनभर में लगभग 18 बार बंद करना पड़ता है, जिससे पोर्ट में गाड़ियां फंस जाती हैं।
मंत्रालय के अनुसार, इस फ्लाईओवर का निर्माण कार्य शुरू होने के बाद इसे 30 महीनों यानी ढाई साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।