नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में शुक्रवार को आयोजित एक कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में पदक जीतने वाले भारतीय सेना के जवानों से भेंट की। इन खेलों में भारत को मिले कुल 39 पदकों में से रक्षा बलों के जवानों ने 18 पदक हासिल किए। सेना के एथलीटों ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 8 स्वर्ण, 7 रजत और 1 कांस्य पदक अपने नाम किए, जबकि नौसेना के खिलाड़ियों ने 2 पदक अर्जित किए।
थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ की उपस्थिति में रक्षा मंत्री ने खिलाड़ियों की लगन की प्रशंसा करते हुए कहा कि जवानों ने हर दबाव को पार कर देश का मान बढ़ाया है। उन्होंने पदक विजेताओं को ‘सैनिक और चैंपियन का बेमिसाल संगम’ बताते हुए कहा कि उनका यह प्रदर्शन देश की युवा पीढ़ी को प्रेरित करेगा। रक्षा मंत्री ने खिलाड़ियों को भविष्य के एशियाई खेलों और ओलंपिक में भी इसी लय को बरकरार रखने का संदेश दिया।
राजनाथ सिंह ने विशेष रूप से महिला मुक्केबाजों की सराहना की, जिन्होंने बॉक्सिंग के 6 में से 4 स्वर्ण पदकों पर कब्जा जमाया। उन्होंने इसे सशक्त होती नारी शक्ति का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि खेल के मैदान और सशस्त्र बलों में युवतियों की भागीदारी को बढ़ावा देगी। उन्होंने कहा कि आज देश के कोने-कोने से नई खेल प्रतिभाएं सामने आ रही हैं, जो भारतीय खेलों के व्यापक होते दायरे को दर्शाता है।
इस बार ग्लासगो में सैन्य खिलाड़ियों ने कई नए रिकॉर्ड भी अपने नाम किए। भारतीय मुक्केबाजी दल ने कुल 7 स्वर्ण पदक जीतकर एक सदी पुराने इंग्लैंड के रिकॉर्ड को ध्वस्त किया, जिसमें सेना के मुक्केबाजों का योगदान 6 स्वर्ण और 2 रजत रहा। एथलेटिक्स में नायब सूबेदार गुलवीर सिंह ने 10,000 मीटर में रजत और 5,000 मीटर में कांस्य जीतकर एक ही संस्करण में दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय बनने का गौरव पाया। इसके साथ ही हाई जंप में नायब सूबेदार सर्वेश कुशारे ने पहला रजत और जूडो में हवलदार हर्ष सिंह ने देश को पहला स्वर्ण दिलाया।
पैरा एथलेटिक्स के शॉट पुट (F-57) इवेंट में सूबेदार सोमन राणा ने स्वर्ण और लांस नायक शुभम जुयाल ने रजत पदक हासिल किया। भारोत्तोलन में हवलदार अजया बाबू ने 149 किग्रा स्नैच के साथ नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया और कुल 330 किग्रा वजन उठाया। इस ऐतिहासिक प्रदर्शन में खिलाड़ियों के कड़े अनुशासन के साथ-साथ ‘मिशन ओलंपिक विंग’, हाई परफॉर्मेंस नोड्स, खेल विज्ञान विशेषज्ञों और सहयोगी स्टाफ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।