मध्य प्रदेश में 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जेल विभाग की ‘समय पूर्व रिहाई नीति, 2025’ के अंतर्गत प्रदेश भर की जेलों से कुल 115 पात्र बंदियों को रिहा किया गया। रिहा होने वालों में 110 पुरुष और 5 महिला बंदी शामिल हैं।
जेल प्रशासन के अनुसार, इन कैदियों को कारागार में निरूद्ध रहने के दौरान उनके अनुशासित आचरण, सकारात्मक व्यवहार और तय नियमों के निष्ठापूर्वक पालन के आधार पर समय से पहले मुक्ति दी गई है। राज्य की समय पूर्व रिहाई नीति के तहत हर साल पांच प्रमुख अवसरों—गणतंत्र दिवस, अंबेडकर जयंती, स्वतंत्रता दिवस, गांधी जयंती और राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस—पर पात्र बंदियों की रिहाई की व्यवस्था की गई है।
सर्किलवार आंकड़ों के अनुसार, जबलपुर सर्किल से सर्वाधिक 18 बंदियों को रिहा किया गया। इसके अलावा भोपाल एवं रीवा सर्किल से 15-15, इंदौर व उज्जैन सर्किल से 12-12 और सतना सर्किल से 11 बंदियों को रिहाई मिली। वहीं सागर सर्किल से 08, नर्मदापुरम व बड़वानी सर्किल से 07-07, ग्वालियर से 06 तथा नरसिंहपुर सर्किल से 04 बंदियों को जेल से मुक्त किया गया।
जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं, मध्य प्रदेश के महानिदेशक डॉ. वरुण कपूर ने रिहा हुए सभी बंदियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बंदियों को भविष्य में किसी भी प्रकार के अपराध से दूर रहने तथा समाज में एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में जीवन बिताने का परामर्श दिया।
डॉ. कपूर ने बताया कि कारावास की अवधि के दौरान इन बंदियों के पुनर्वास को प्राथमिकता दी गई थी। जेलों में उन्हें टेलरिंग, कारपेंट्री, लोहारी, भवन मिस्त्री और भवन-सामग्री निर्माण जैसे व्यवसायों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि रिहाई के बाद वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें और समाज की मुख्यधारा से दोबारा जुड़ सकें।