अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश में सख्त चुनावी नियम लागू करने की मांग करते हुए भारतीय निर्वाचन प्रणाली की सराहना की है। सोमवार को सोशल मीडिया पर दिए एक बयान में उन्होंने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के हवाले से अमेरिकी मतदान प्रक्रिया में मतदाता पहचान की अनिवार्यता पर सवाल उठाया।
सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर ट्रंप ने बताया कि इस महीने की शुरुआत में भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अमेरिकी प्रशासनिक अधिकारियों से संवाद के दौरान यह जिज्ञासा व्यक्त की थी कि अमेरिका में वैध फोटो पहचान पत्र के बिना मतदान कैसे कराया जाता है।
भारत में हालिया आम चुनावों के आंकड़ों का हवाला देते हुए ट्रंप ने कहा कि वहां 64.6 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि भारत में डाक मतपत्रों का उपयोग एक प्रतिशत से भी कम रहा और मतदान केंद्र पर प्रत्येक नागरिक के लिए वैध पहचान दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य था।
ट्रंप ने इन उदाहरणों के जरिए ‘सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी’ (सेव) अमेरिका एक्ट को तुरंत पारित करने की आवश्यकता जताई। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य चुनावी पंजीकरण के दौरान नागरिकता का प्रमाण अनिवार्य करना, देशभर में वोटर आईडी लागू करना और डाक द्वारा मतदान को बेहद सीमित करना है, जिससे कथित चुनावी गड़बड़ियों को रोका जा सके।
इस विधेयक को लेकर अमेरिकी राजनीति में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दलों के बीच गहरा मतभेद बना हुआ है। अमेरिकी सीनेट ने अपने पांच सप्ताह के अवकाश पर जाने से पहले इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसी बीच, व्हाइट हाउस की वेबसाइट पर जारी एक तथ्य-पत्र में रेखांकित किया गया है कि भारत और ब्राजील जैसे देश मतदाता पहचान को बायोमेट्रिक डेटाबेस से जोड़ चुके हैं, जबकि अमेरिका में मतदाता पात्रता केवल स्व-घोषणा पर निर्भर है।
उल्लेखनीय है कि इस विधेयक में चुनाव सुधारों के अतिरिक्त कुछ अन्य प्रावधान भी शामिल हैं, जिनमें पुरुषों को महिला खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने से स्थायी रूप से प्रतिबंधित करना और नाबालिगों के लिंग परिवर्तन से जुड़े ऑपरेशनों पर रोक लगाना शामिल है।