गुवाहाटी-तेजपुर 4-लेन नियंत्रित कॉरिडोर को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी

गुवाहाटी-तेजपुर 4-लेन नियंत्रित कॉरिडोर को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने इस महीने की शुरुआत में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के 135.87 किलोमीटर लंबे चार-लेन गुवाहाटी-तेजपुर नियंत्रित प्रवेश (एक्सेस-कंट्रोल्ड) कॉरिडोर के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। राष्ट्रीय राजमार्ग-15 का हिस्सा बनने वाला यह नया मार्ग पूर्वोत्तर के आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे को मजबूती प्रदान करेगा।

करीब 8,970.20 करोड़ रुपये की कुल पूंजीगत लागत से तैयार होने वाला यह राजमार्ग बिल्ट-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी) टोल मॉडल पर विकसित किया जाएगा। यह मार्ग गुवाहाटी के निकट स्थित बैहाटा चारियाली को तेजपुर से सीधा जोड़ेगा, जिसमें 15.11 किलोमीटर लंबा मंगलदोई बाईपास शामिल नहीं है। इसके साथ ही यह असम के गुवाहाटी से अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर और पासीघाट के बीच अंतर-राज्यीय सड़क संपर्क को भी सुगम बनाएगा।

इस आधुनिक कॉरिडोर के निर्माण से वाहनों की औसत गति दोगुनी (100 प्रतिशत वृद्धि) होने और यात्रा के समय में 50 प्रतिशत तक की कमी आने का अनुमान है। इससे ईंधन दक्षता में सुधार होगा और परिचालन लागत घटेगी। घनी आबादी वाले कस्बों से भारी यातायात को अलग रखने के लिए मार्ग पर 58.7 किलोमीटर लंबे पांच प्रमुख बाईपास बनाए जाएंगे, जो बैहाटा चारियाली, सिपाझार, खारूपेटिया, डेकियाजुली और तेजपुर में जाम की समस्या को कम कर स्थानीय स्तर पर सड़क सुरक्षा को बेहतर करेंगे।

इंजीनियरिंग और निर्माण के लिहाज से परियोजना में 15 बड़े पुल, 30 छोटे पुल, 19 फ्लाईओवर, 46 अंडरपास और 210 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड का प्रावधान किया गया है, ताकि क्रॉस-मूवमेंट प्रभावित न हो। वन्यजीवों की सुरक्षा के मद्देनजर तेजपुर बाईपास पर एक एलीफेंट अंडरपास भी बनाया जाएगा। पीएम गतिशक्ति के तहत यह कॉरिडोर 8 आर्थिक, 2 सामाजिक, 3 पर्यटन और 7 लॉजिस्टिक्स केंद्रों को आपस में जोड़ेगा, जिनमें 3 प्रमुख रेलवे स्टेशन, 2 हवाई अड्डे और 2 जलमार्ग टर्मिनल शामिल हैं।

रणनीतिक दृष्टिकोण से तेजपुर बाईपास पर भारतीय वायु सेना के समन्वय से 4.9 किलोमीटर लंबी आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ईएलएफ) विकसित करने की योजना है। यह कॉरिडोर ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी किनारे पर स्थित मौजूदा एनएच-27 पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर पर वाहनों के दबाव को हल्का करेगा। इसके अलावा, मां कामाख्या मंदिर, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और ओरंग राष्ट्रीय उद्यान जैसे प्रमुख स्थलों के लिए एक मजबूत पर्यटन सर्किट भी तैयार होगा।

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